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अरमानो के महल ...!!!

मेरे अरमानों !के महल कब के ढह गये , और वक्त की लहरों के संग बह गये ,क्या इतनी कच्ची थी मेरे प्यार की नीवं , जमाने के थपेड़े भी इससे सहे न गये । सच्चे प्यार से बनाते गर आशियाने अपने , जो आये थे बर्बाद करने वो यहीं रह गये । अब भी वक्त है संभालो अंजुमन अपनी
 
कमलेश वर्मा