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कैसे समझाएंगे भावी पीढ़ी को

दुर्गेश मिश्राघर बैठे मैं एक दिन टीवी पर धारावाहिक झांसी की रानी देख रहा था। उसमें बार बार बनारस, बिठूर और कानपुर का नाम आ रहा था। वैसे तो हमें टीवी देखने का समय ही नहीं मिलता, क्यों कि अखबारी लाइन ही कुछ एसी है। बिल्कुल संडिला की लड्डू की तरह बंद हांडी,
 
pankaj mishra
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बचाएं ताल तलैया और पोखर को

दुर्गेश कुमार मिश्राआफिस में बैठे खबरों की एडिंग कर रहा था उसी क्रम में अंबाला के किसी गांव की खबर हमारे सामने एडिट के लिए आयी, जिसमे लिखा था महिलाएं पीने के पानी के लिए दूसरे गांव जाती हैं, कारण गांव में लगा सरकारी नलकूप एक साल से खाराब पडा है। समझ में
 
pankaj mishra
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