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कौन हो तुम जो सपनो मे छेड जाती हो !!!!!

(एक बार फिर पूरानी यादे जो अपके सामने प्रस्तुत है)कौन हो तुमजो अकसरमेरी यादो के झरोखे सेझांक झांक जाती होऔर घूंघट उठाते हीदूर दूर तक भीकही नजर नही आती होअजीब बात है यहकि जब बन्दकर देता हूँदरवाजे खिड्कियाँ सबतभी तुम आती होचुपके चुपकेपता नही किधर