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सबबे-वफ़ा

दिलों के धड़कने का कुछ तो सबब होगा , गुलों के चटकने क कुछ तो सबब होगा।वफ़ा और तारीख मे है न रिश्ता पर , वफ़ा के बदलने का कुछ तो सबब होगा ।सितम ज़ुल्म बेदार रखती है बग़ावत को , रगों के सुलगने का कुछ तो सबब होगा।शहादत किसे रास आती जवानी में , कि सरहद में मरने
 
ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι
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तेरा ना होना

आज इक बार फिर तेरा ना होना नागवार गुजरा है. वीरानी शाम में आशिक हवाओं ने मुझे बदनाम समझा है. पुराने जख्म अब पककर,मलहम से हाथ चाहेंगे. सनम आ जाए महफ़िल में ,दुआं दिन रात मांगेंगे. अभी इक दर्द का लश्कर सीने के पर उतरा है….   कहूँ साजिश सितार