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वक्त पड़े तो वह दिल भी बदल लेते हैं-हिन्दी शायरी

किसी के एक चेहरे की एक अदा पर यकीन न किया करो बाज़ार के सौदागरों के इशारों पर अदाकार कभी मुखौटे तो कभी अदायें बदल लेते हैं। तुम अपने जज़्बातों पर काबू रखो जुबां से भले ही तारीफ करो पर दिल मत लगाओ उनकी अदाओं में वक्त पड़े तो वह दिल भी बदल लेते
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एकता की कोशिश-हिन्दी शायरी

भीड़ में एकता की कोशिश पर हंसी आ ही जाती है। जहां पहले ही चीख रहे हैं लोग अपनी करनी का बखान करते हुए बंद किये हैं कान, आंखों  से ढूंढ रहे अपने लिये सम्मान, वहां शांति के नारे की आवाज शोर करती नजर आती है। ——- वफादारी  खामोश जज़्बात के