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बेमौसम की होली

पोस्‍ट नंबर - 19 बेमौसम की होली बीजेपी की टोली 1. हम आप सभी होली खेलते हैं, एक दूसरे पर रंग डालते हैं गुलाल लगाते हैं, कीचड़ फेंकते हैं, गोबर फेंकते हैं, कीचड़ में‍ छिपाकर कंकड़ मारते हैं, बहाने से धक्‍का दे देते हैं और मौका मिलते ही औंधे मुंह पटक देते
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अपराध बोध

जिनके इशारों पर मैं चलाता रहा पत्‍थर, उनकी मुस्‍कराहटों के पहचान ये पत्‍थर । जब लौट कर आये मेरे लिये, त‍ब भी वे मासूमियत से मुस्‍कराते रहे। मैं तड़पता रहा दोनों दर्दों* से, वे मुस्‍कराते आम हमदर्दों से। * लौटे हुये पत्‍थरों की चोट और उनकी मुस्‍कराहट