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पंचवटी

नासिक शहर में ही हैं पंचवटी। देख कर लगा तमाम कोशिशों के बावजूद पंचवटी में वन का माहौल नही बन सका हैं, शहर हावी हैं। कहीं-कहीं सड़क के दोनों किनारे घने पेड़ और विचरते पशु वन का आभास कराते हैं। सबसे पहले हम पहुंचे पंचवटी के अंतिम छोर पर जहां गौतमी और
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त्रियम्बकेश्वर मंदिर और कुशावर्त तीर्थ

नासिक में सबसे पहले हम त्रियम्बकेश्वर मंदिर देखने गए। मंदिर का परिसर विशाल हैं जिसमे अंतिम छोर पर हैं कुशावर्त तीर्थ। परिसर के प्रवेश पर ही कैमरे की मनाही से एक भी चित्र नही ले सके। मंदिर का गोपुरम कुछ इस तरह से बना हैं कि यह रूद्राक्ष के मनको से बना
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घ्रशणेश्वर और अन्य मंदिर

औरंगाबाद का प्रसिद्ध मंदिर हैं - घ्रशणेश्वर मंदिर - यह शिव मंदिर हैं। मंदिर अन्य मंदिरों जैसा ही हैं पर यहाँ की विधा निराली हैं। भीतर गर्भ गृह में शिव लिंग हैं जो आकार-प्रकार में सामान्य हैं। यहाँ पूजा के लिए कोई पुजारी नही हैं। श्रद्धालु बाहर सजी
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अथ श्री महाकाल दर्शन कथा

धरम-करम में हालांकि अपनी कोई आस्था नहीं है लेकिन मां बाबूजी खासकर मां बहुत अधिक धार्मिक प्रवृत्ति की है। सो शुक्रवार को उन्हें लेकर महाकाल की नगरी उज्जैन गया था। पता नहीं क्यों बचपन से हर बार ऐसा हुआ है कि जब भी किसी धार्मिक स्थान पर गया हूं विरक्ति थोड़ी
 
संदीप पाण्डेय
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हर वर्ष वही-वही विचार

राजनीतिक पार्टियाँ क्या सोचती है, हिन्दू संगठन क्या सोचते है, कैसे अपने मत बदलते है…मुझे इससे कोई सरोकार नहीं, मगर यह सदा से मानता आया हूँ कि अयोध्या में राम-मन्दिर का न होना....
 
संजय बेंगाणी
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केसरगुट्टा मन्दिर के दामन में उद्यान

पिछले चिट्ठे में मैनें बताया आन्ध्र प्रदेश के केसरगुट्टा के शिव मन्दिर के बारे में जहाँ श्रावण मास में पूजा का महत्व है। श्रावण की पूजा के बाद सावन का आनन्द लेने के लिए मन्दिर की पहाड़ी के दामन है ख़ूबसूरत उद्यान जिसके ऊपर पहाड़ी से दिखते कमल सरोवर की त
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केसरगुट्टा का शिव मन्दिर

आन्ध्रप्रदेश में केसरगुट्टा के शिव मन्दिर की बहुत मान्यता है। श्रावण मास में यहाँ बहुत श्रृद्धालु आते है। इस श्रावण में हम भी पहुँच गए। यह नलगोण्डा ज़िले में है और हैदराबाद से डेढ घण्टे की दूरी पर है। ऊँचे पहाड़ पर स्थित है यह मन्दिर जैसा कि नाम से ही
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आइये करें मंदिरों में छेड़छाड़

छाम्माक्छाल्लो स्वभाव से ईश्वर विरोधी नही है. मगर जब धर्म के नाम पर वह ऎसी-वैसी हरक़त होते देखती है तब उसे धर्म के इन ठेकेदारों के प्रति घृणा होने लगती है. उसे लगाने लगता है कि वह क्यों ऎसी जगह आ कर अपना समय और मन खराब कर रही है. बात बहुत पुरानी है.
 
Vibha Rani
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सरस्वती के चरणों में अक्षर अभ्यास

बसन्त पंचमी के दिन बासर के इस सरस्वती मन्दिर का दृश्य निराला होता है। बाहर बाज़ार में पाटी (स्लेट) कलम तथा पीले और सफ़ेद फूलों का अंबार लगा होता है। केले के पत्तों और फूलों से सजे छोटे-छोटे मंडप भी बिकते है। मुख्य मन्दिर आँगन में बीचों-बीच है और सामने