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वार्षिक संगीतमाला 2009 : पायदान संख्या 21 - क्या आपकी जिंदगी से भी कोई शख्स गुमशुदा है?

हिंदी फिल्म संगीत में कई बार ऍसा होता है कि जब आप किसी गीत को सिर्फ सुनते हैं तो वो आप पर जबरदस्त प्रभाव डालता है पर फिल्म को देखते समय वो गीत कहानी में घुलता मिलता नज़र नहीं आता। पर दूसरी ओर परिस्थितिजन्य गीत होते हैं जो कहानी की पटकथा के अनुसार अपने आप
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वार्षिक संगीतमाला 2009 : पायदान संख्या 22 - ये जिंदगी भी क्या क्या हमको दिखलाती है..

तो भाइयों और बहनों वार्षिक संगीतमाला की 22 वीं पायदान पर गाना वो जिसे लिखा जावेद अख्तर साहब ने धुन बनाई एक संगीतकार तिकड़ी ने और गीत को गाया एक दूसरे संगीतकार ने। प्रतिस्पर्धा के इस युग में आजकल ये स्वस्थ परंपरा चली है कि संगीतकार कुछ दूसरे संगीतकारों को
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जब ग्यारह वर्षीय बालक हेमंत बृजवासी ने भाव विभोर किया आशा ताई को..

नवरात्र शुरु हो गए हैं और कल ईद सोल्लास मनाई जा चुकी है। पर्व त्योहारों के इस मस्ती भरे दौर में ब्लॉग पर भी मस्ती का रंग चढ़ना लाज़िमी है ना। आज जो मूड मन में तारी है उसका पूरा श्रेय जाता है मथुरा के ग्यारह वर्षीय बालक हेमंत बृजवासी को। हफ्ते भर से हेमंत
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राग 'ख़माज' पर आधारित एक प्यारा नग्मा "मोरा सैयां मोसे बोले ना....."

सा रे गा मा पा' जी टीवी का एक ऍसा कार्यक्रम है जिसके प्रतिभागी हर साल कुछ ऍसे गीत जुरूर चुनते हैं जिसमें उनकी गायन प्रतिभा निखरकर आ सके। अभी पिछले हफ्ते की बात है, पीसी के सामने बैठकर कीबोर्ड पर उंगलियाँ घिस रहा था कि बगल के कमरे से इस गीत का मुखड़ा स