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मन का अन्तर्द्वन्ध..किसी कोने से ...!!!

मेरा तन- मन उचाट क्यूँ है? इस पूरे जहान से , चिड़ियों ने भी समेट लिये , घोंसले मेरे मकान से ।! इंसानों में खुदगर्जी हो गयी ,इस कदर हावी , जड़ भी कहने लगे ,हम अच्छे है इस इन्सान से ।! फिजां की इन सरसराती हवावों में है ,बू साजिश की, इनकी दोस्ती से है कहीं
 
कमलेश वर्मा