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डॉ श्याम गुप्त का गीत ...कुछ पलों को और ....
कुछ पलों को और....कुछ पलों को और रुक जाओ सजनि तुम ,मैं प्रणय की याचना वंदन तो करलूं |रूप की रस गंध प्राणों में बसालूँ,प्रीति के मधु पल ह्रदय में बंद करलूं |ये तेरे पिक बैन पिकबयनी प्रिया,गीत के बोलों में ढालूँ, बंद भरलूँ । सुछवि आँखों में बसालूँ हे
May 31 2010 05:51 PM



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