पसंद करें
0
नापसंद करें

डॉ श्याम गुप्त का गीत ...कुछ पलों को और ....

कुछ पलों को और....कुछ पलों को और रुक जाओ सजनि तुम ,मैं प्रणय की याचना वंदन तो करलूं |रूप की रस गंध प्राणों में बसालूँ,प्रीति के मधु पल ह्रदय में बंद करलूं |ये तेरे पिक बैन पिकबयनी प्रिया,गीत के बोलों में ढालूँ, बंद भरलूँ । सुछवि आँखों में बसालूँ हे