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दिल चाहता है....

आज कुछ करने को दिल चाहता है ....चाहता है, इन दरो-दीवारों को तोड़ कर...मै उड़ चलु, दूर बहुत दूर आसमा की और...हां वो आसमा जो हमे ऊपर उठना सिखाता है....वो आसमा जो निर्मल, निश्छल और पावन है...जहा न जातिवाद, नक्सलवाद, ना ही भाषावाद है...हां वो आसमा जो हर प्राणी
 
Swati
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उफ़ परसाई हाय परसाई ।

जबलपुर से हिमांशु दादा ( हिमांशु रॉय ) का मेल आया है । उन्‍होंने सूचित किया है कि बाईस अगस्‍त को यानी आज के दिन जबलपुर इप्‍टा 'विवेचना' द्वारा परसाई जी का जन्‍मदिन मनाया जा रहा है । ये ऐसे मौक़े होते हैं जब जबलपुर विकलता से याद आता है । जब मैं जबलपुर में
 
yunus
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चाँद

अभी अपने घर की छत पर थी...ठंडी हवा चल रही थी...आसमान में चाँद, तारे, बादल सभी थे...बिजली चले जाने से घरों और सड़कों में अँधेरा था पर इससे आसमान के नज़ारे स्पष्ट दिख रहे थे....देखते देखते कुछ शब्द मन में घूमने लगे................. वो दूर आसमान मेंचाँद पिघल
 
Shikha Deepak
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जन्म

पहचाने जबअनजाने लोगदेखी दुनियाऔर उसकी सोचकोई अपनाजब दूर गयाया कोई दूर सेपास आ गयामिली खुशी याआयी विपदासंतोष मिला यामिली जो चिंतातृष्णाओं कोजब भी नापाशब्दों केअर्थों को मापाजब जब ख़ुद कोपढ़ा है मैंने अंतर्मन कोसुना है मैंने तब तब मेरेमनस हृदय मेंएक कविता
 
Shikha Deepak
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न आए आप ............

न आए आप याद आपकी आती रहीबस इस तरह से जिन्दगी भरमाती रहीदेख लूँ आपको बस एक आखिरी बारइसी हसरत में साँसें भी आती जाती रहींजब भी आना चाहा हमने आपके पासराहें भी मेरे सफर को ठुकराती रहींसीने में उठ के दर्द की लहरें बार बारदिल को मेरे थपकाती सुलाती रहींखाई थी
 
Shikha Deepak
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ख़्वाब

मेरे ख़्वाबों में इतना ताप थाकि दिल पे छाले पड़ गएमेरी हसरतें इतनी ऊंची थीकि हाथ छोटे पड़ गएहर ख़्वाब टूटा बिखर गयाशीशे का घरौंदा चटख गयाजीवन ने इतना दर्द दियाहर साँस टीस सी लगती हैहर धड़कन दिल में सिसकती हैजो शब्द घुमड़ते हैं मन मेंहोठों पे आने से डरते
 
Shikha Deepak
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जो बस खरीद ले एक झंडा......

नोएडा मोड़ पर गाड़ी रूकती है बत्ती लाल होती है, मिनटों में हरी हो जाती है। गाड़ी फिर आगे बढ़ जाती है, पर मन वहीं थम जाता है। कई चेहरे एक साथ याद आते हैं दिन अकले रह जाता और रात भी अकेली गुजर जाती है। मैं उन चेहरों को याद करना चाहता हूं जिसे नोएडा मोड
 
गिरीन्द्र नाथ झा