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दिल चाहता है....
आज कुछ करने को दिल चाहता है ....चाहता है, इन दरो-दीवारों को तोड़ कर...मै उड़ चलु, दूर बहुत दूर आसमा की और...हां वो आसमा जो हमे ऊपर उठना सिखाता है....वो आसमा जो निर्मल, निश्छल और पावन है...जहा न जातिवाद, नक्सलवाद, ना ही भाषावाद है...हां वो आसमा जो हर प्राणी
Jan 12 2010 12:07 PM



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