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मधुशाला

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा
 
पवन कुमार अरविन्द (Pawan Kumar Arvind)
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मेरा गीत, मेरी मधुशाला…!!!

काफी समय बीत गया रुह चुराने में… शायद जीवन और लगे उसे पास लाने में"। इस दौरान मेरे एक मित्र मधुमये जी जो संगीतकार हैं, उन्होंने मुझे प्रेरित किया गीत लिखने के लिए और बस कलमबद्ध गीत की संगीतमय रुपरेखा तैयार हो गई… वैसे तो ये बहुत पहले ही संगीतबद्ध हो
 
Divine India
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मधुशाला

मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला,भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला,उठा कल्पना के हाथों से स्वयं उसे पी जाता हूँ,अपने ही में हूँ मैं साकी, पीनेवाला, मधुशाला।।५।मधुशाला(हरिवंशराय बच्चन)