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मधुराष्टकं

मधुराष्टकं की रचना महान वैश्न्वाचार्य श्री वल्लभाचार्यजी ने की थी। यह एक अत्यन्त सुंदर स्तोत्र है जिसमें मधुरापति भगवान् कृष्ण के सरस और सर्वांग सुंदर रूप और भावों का वर्णन है। मधुराष्टकं मूल रूप से संस्कृत में रचित है। मधुराष्टकं में आठ पद हैं और हर पद