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मई दिवस का सन्देश - स्मृति से प्रेरणा लो! संकल्प को फौलाद बनाओ! संघर्ष को सही दिशा दो!

मजदूर साथियो! नयी सदी में पूँजी के खिलाफ वर्ग युध्द में फैसलाकुन और मुकम्मल जीत के लिए आगे बढ़ो!!सम्पादक मण्डलजब तक लोग कुछ सपनों और आदर्शों को लेकर लड़ते रहते हैं, किसी ठोस, न्यायपूर्ण मकसद को लेकर लड़ते रहते हैं, तब तक अपनी शहादत की चमक से राह रोशन
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मजदूर

मजदूर दिवस पर मेरी कविता पढें यहाँ क्लिक करके
 
Razia
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ढाई हजार मौतें!

राजकुमार सोनी यह जो सड़क पर खून बह रहा है इसे सूंघकर तो देखोऔर पहचानाने की कोशिश करो ये हिन्दू का है या मुसलमान का किसी सिख का है या ईसाई का किसी बहन का है या भाई का सड़क पर इधर-उधर पड़े पत्थरों के बीच दबे टिफिन कैरियर से जो रोटी की गंध आ रही है वह किस
 
राजकुमार सोनी
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लुधियाना को ना लग जाए मुंबई का रोग

एक प्रवासी मजदूर को पुलिसवाले और स्थानीय लोग मिलकर पीट रहे हैं।   लुधियाना में हुई हिंसा का यह फोटो आज एक अखबार में छपा है। फोटो यह बताने के लिए काफी है कि 'दिल लेने दिल देने में नंबर वन' पंजाबियों के दिलों में सिर्फ 24 घंटे के भीतर ही पुलि
 
प्रभाष झा
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मजदूरबोध का महान कवि‍ मुक्‍ति‍बोध - वि‍श्‍वनाथ त्रि‍पाठी

           सबसे पहली बात यह कि‍ मुक्‍ति‍बोध अखण्‍ड भाकपा के सदस्‍य थे। शमशेरबहादुर सिंह ने 'चॉंद मुँह टेढ़ा है' की जो भूमि‍का लि‍खी है उसमें मजदूरों लि‍ख है की मजदूरों के जुलूसों में भाग लेते थे, जुलूस पर जो पुलि‍स के
 
sudha singh
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नौ साल के नौकर से हैल्प हो जाती है

भाई सा’ब यहाँ है तो अच्छा खाने को मिलता है. अच्छी जगह रह रहा है. खुश न होता तो गाँव न भाग जाता. और हम कौन सा पहाड़ तुड़वाते है इससे? घर का छोटा-मोटा काम करता है या थोड़ी बहुत “हैल्प” हो जाती है, बस. भाषण झाड़ने से भूख नहीं मिटती जनाब.
 
संजय बेंगाणी
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"विश्वास नहीं होता, लेकिन सच है"

विश्वास तो नही होता लेकिन करना पङ रहा है, शायद आप भी पढने के बाद विश्वास कर लेंगे। क्या आपको पता है विकसित देशो में जितना खाना बर्बाद होता है उससे 1.5 अरब लोगो का साल भर तक पेट भर तक सकता है जी हाँ सही सुना आपने। इन देशो की सूची मे अमरिका और ब्रिटेन
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आपस की बात

मित्रवत साथियो, क्या आप जानते हैं कि शोषण करने वाला शोषण सहने वाले से ज्यादा गुनहगार होता है। और सभी जानते हैं, शोषण सहने वाला अधिक परिश्रमी होता है और शोषण करने वाला ऐयाशबाज़ होता है और हवेली में आरामदेह जीवन बिताता है। लेकिन ऐसा क्यों? ऐसा सवाल एक
 
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
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प्रवासी मज़दूर: चिकित्सा सेवाओं के शरणार्थी

बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से भी वंचित रहते हैं प्रवासी मज़दूर हर साल करोड़ों स्‍त्री-पुरुष गाँवों में फसल का काम ख़त्म होते ही रोज़गार की तलाश में देश के महानगरों की ओर चल पड़ते हैं। निर्माणस्थलों, ईंटभट्ठों और पत्थर की खदानों में कमरतोड़ काम करने हुए ये
 
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
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रहीम के दोहेःकीचड़ का जल समंदर से अधिक सम्मानीय

धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स्थान पर पड़ा जल भी धन्य है जिसे छोटे जीव पीकर तृप्त तो हो जाते हैं। उस समंदर की प्रशंसा कौन करता है जिसके पास जाकर भी कोई उसका पानी नहीं पी सकता। वर्त
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