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मंटो को खत

सुबह उठते ही मुझे याद आया कि आज तो 11 मई है, उर्दू के महान कथाकार सहादत हसन मंटो का जन्मदिन है। मंटो का ख्याल आते ही ‘टोबा टेक सिंह’ से लेकर ‘ठंडा गोस्त’ तक यानी पूरा मंटो मेरे सामने खड़ा हो गया, बिल्कुल होषोहवास में। मुझे तो भरोसा ही नही हो रहा था कि
 
skmeel
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सआदत हसन मंटो की लघुकथाएं

कम्युनिज्मवह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया । एक ने ट्रक के सामान पर नजर डालते हुए कहा, ‘‘देखो यार, किस मजे से इतना माल अकेला उड़ाये चला जा रहा है।’’ समान के मालिक ने कहा, ‘‘जनाब माल
 
अरविन्द श्रीवास्तव
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मरे नहीं हैं मंटो

सआदत हसन मंटो के बारे में कुछ भी लिखना कम होगा। पिछली बार लाहौर यात्रा में उनके निवास लक्ष्‍मी मैंशन की खोज अधूरी रही थी। हां,उनके चौराहे के अनारकली ज्‍यूस सेंटर से हो आए थे। ऐसा नहीं लगा कि पाकिस्‍तान उनके नाम पर गर्व करता है। वैसे अपने यहां भी कौन