पापा की बिटिया और ट्रेन-पकड़-शौर्य गाथा (भोपाल यात्रा - अंतिम भाग)
घर से रेल्वे स्टेशन का रास्ता होगा यही कोई बीस मिनिट का. स्वतन्त्रता दिवस पर काफ़ी सारा बाज़ार बन्द था, सड़कों पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी. पन्द्रह मिनिट में ये सफ़र पूरा कर लेने की उम्मीद लेकर २:१० पर घर से निकला गया. ट्रेन २:४० पर थी. लगा था कि इतना समय
Sep 04 2009 08:41 AM



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