भिक्षुक
(फोटो साभार: Ronn Ashore - Flickr)[वह आता,दो टूक कलेजे के करतापछ्ताता पथ पर आता – निराला ]दिसंबर की ठिठुरती ठंड मेंदिल्ली के जनपथ परमुझे याद आ गए कविवर निरालाजब दिखा ‘भिक्षुक’ मुझे इकख़ुद में गठरी की तरह सिमटा हुआऔर माँगने को रुपए - दो रुपए सभी को
Apr 26 2010 09:12 PM



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