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प्रमुख हिन्दी फिल्में

फिल्म का नाम वर्ष प्रमुख कलाकार देवदास 1935 के.एल. सहगल अछूत कन्या 1936 अशोक कुमार, देविका रानी पुकार 1939 सोहराब मोदी, नसीम बानो सिकंदर 1941 पृथ्वीराज कपूर, सोहराब मोदी किस्मत 1943 अशोक कुमार शहीद 1948 दिलीप कुमार, कामिनी कौशल बरसात 1949 राज कपूर, नरगिस
 
जी.के. अवधिया
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महबूब खान … भारतीय सिनेमा के अग्रणी निर्माता-निर्देशक

भारतीय सिनेमा को आधुनिकतम तकनीकी से सँवारने में अग्रणी निर्माता-निर्देशक महबूब खान का अहं किरदार रहा है। महबूब खान हॉलीवुड के फिल्मों से बहुत अधिक प्रभावित थे और भारत में भी उच्च स्तर के चलचित्रों का निर्माण करने में जुटे रहते थे। सन् 1951 में उनके
 
जी.के. अवधिया
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राजा हरिश्चन्द्र – भारत की पहली फीचर फिल्म

दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्मित तथा सन् 1913 में प्रदर्शित फिल्म “राजा हरिश्चन्द्र” को भारत की पहली फीचर फिल्म होने का श्रेय प्राप्त है। “राजा हरिश्चन्द्र” चार रीलों की लम्बाई वाली एक मूक फिल्म है। इस फिल्म की कहानी हिन्दू
 
जी.के. अवधिया
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कुछ बातें धर्मेंद्र के बारे में

रोल चाहे फिल्म सत्यकाम के सीधे सादे ईमानदार हीरो का हो, फिल्म शोले के एक्शन हीरो का हो या फिर फिल्म चुपके चुपके के कॉमेडियन हीरो का, सभी को सफलता पूर्वक निभा कर दिखा देने वाले धर्मेंद्र सिंह देओल अभिनय प्रतिभा के धनी कलाकार हैं। सन् 1960 में फिल्म दिल भी
 
जी.के. अवधिया
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भारतीय सिनेमा का स्वर्णिम काल – सन् 1950 से 1980

भारतीय सिनेमा विकास के रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ता ही गया और उसने मुड़कर कभी पीछे नहीं देखा। किंतु सन् 1950 से उसका स्वर्णिम काल प्रारंभ हुआ। रोचक कथानकों और सुमधुर गीत संगीत के मेल होने के कारण अद्वितीय फिल्में बनने लगीं। राज कपूर, महबूब खान, गुरु दत्त,
 
जी.के. अवधिया
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संगीत के असाधारण ताल

जरा याद कीजिये फिल्म काला बाजार के गीत ‘अपनी तो हर आह एक तूफान है…..’ को। या फिल्म दोस्त के गीत ‘गाड़ी बुला रही है…..’ को। कुछ विशेषता नजर आती है इनमें? जी हाँ इन गानों में रेलगाड़ी की आवाज को ताल के रूप में इस्तेमाल
 
जी.के. अवधिया
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दिलीप कुमार

हिंदी ट्रेजेडी फिल्मों की बात निकले और दिलीप कुमार का नाम न आये ऐसा हो ही नहीं सकता। देवदास, गंगा जमुना, मुगल ए आज़म, संघर्ष….. न जाने कितनी ही ऐसी फिल्में हैं जिन्हें चाह कर भी भुलाया नहीं जा सकता। दिलीप कुमार, जिनका असली नाम युसुफ ख़ान है, का
 
जी.के. अवधिया
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मधुबाला – एक अपूर्व आकर्षक अभिनेत्री

यह कहने में जरा भी झिझक नहीं होनी चाहिये कि मधुबाला अपने समय की सर्वाधिक आकर्षक अभिनेत्री थीं। न केवल बेहतरीन अभिनय बल्कि बेपनाह हुस्न के लिये भी मधुबाला को हमेशा याद किया जायेगा। मधुबाला का असली नाम मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी था। उनका जन्म एक गरीब मुस्लिम
 
जी.के. अवधिया
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गुरु दत्त – एक महान निर्माता निर्देशक व कलाकार

हिंदी फिल्मों के महान निर्देशकों की बात चले और गुरु दत्त का नाम न आये ऐसा हो ही नहीं सकता। निर्माता, निर्देशक और कलाकार गुरु दत्त का पूरा नाम गुरु दत्त शिव शंकर पादुकोने है। उनका जन्म 9 जुलाई 1925 को मेंगलोर में एक सारस्वत परिवार में हुआ था। कलकत्ता
 
जी.के. अवधिया
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देविका रानी भारतीय सिनेमा की प्रथम महिला कलाकार

निःसंदेह भारतीय सिनेमा के लिये देविका रानी का अपूर्व योगदान रहा है और उनका यह योगदान के लिये हमेशा हमेशा याद रखा जायेगा। जिस जमाने में भारत की महियायें घर की चारदीवारी के भीतर भी घूंघट में मुँह छुपाये रहती थीं, देविका रानी ने चलचित्रों में काम करके अदम्य
 
जी.के. अवधिया
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राज कपूर – भारतीय सिनेमा के महान शो-मैन

रणबीर राज कपूर जो कि राज कपूर के नाम से जाने जाते हैं भारत में अपने समय के सबसे बड़े ‘शोमैन’ थे। सन् 1935 में, जब उनकी उम्र केवल 11 वर्ष थी, फिल्म इंकलाब में अभिनय किया था। वे बांबे टाकीज़ स्टुडिओ में सहायक (helper) का काम करते थे। बाद में वे
 
जी.के. अवधिया
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मोहम्मद रफ़ी

मोहम्मद रफ़ी, जो कि रफी साहब के नाम विख्यात हैं, किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं। हिंदी फिल्मों का शौक रखने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्‍ति होगा जो उनके नाम से परिचित नहीं हो। मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्म कोटला सुल्तानसिंह (अमृतसर के पास) में 25 दिसंबर 1925 को
 
जी.के. अवधिया
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संगीत सफर

फिल्म संगीत जब शुरू हुआ, केवल गिने-चुने साज ही उपलब्ध थे साथ ही कई प्रकार की तकनीकी कठिनाइयाँ थीं। आपको शायद पता हो कि पुराने समय में माइक्रोफोन इतने कमजोर होते थे कि रेकार्डिंग के पहले कुछ समय तक उसे गरम करना पड़ता था। साज कम होने के कारण आवाज का महत्व
 
जी.के. अवधिया
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भारतीय सिनेमा – 1930 से अब तक

1930-40 का दशक के.एल. सहगल, सोहराब मोदी, पृथ्वीराज कपूर, देविका रानी, नसीम बानो आदि का रहा। देवदास, अछूत कन्या और पुकार इस दशक की प्रमुख फिल्में रहीं। 1940-50 के दशक में अशोक कुमार छाये रहे। इसी दशक के उत्तरार्ध में दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानंद का
 
जी.के. अवधिया
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अशोक कुमार – स्वाभाविक अभिनय के प्रतीक

अशोक कुमार को उनके स्वाभाविक अभिनय के लिये हमेशा याद किया जाता रहेगा। आपको शायद ही पता होगा कि कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नामक व्यक्ति, जिसका जन्म बिहार के भागलपुर जिले में हुआ था और शिक्षा प्रेसिडेंसी कालेज, कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में संपन्न हुई थी,
 
जी.के. अवधिया
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भारतीय सिनेमा का इतिहास

सात जुलाई अठारह सौ छियासी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अमर दिन है। उस रोज मुंबई (पूर्व नाम बंबई) के वाटकिंस हॉटल में ल्युमेरे ब्रदर्स ने छः लघु चलचित्रों का प्रदर्शन किया था। इन छोटी-छोटी फिल्मों ने ध्वनिविहीन होने बावजूद भी दर्शकों का मनोरंजन किया
 
जी.के. अवधिया