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संजू बाबा.. बहोत हो गई गांधीगीरी

फ़िल्म खलनायक में संजय दत्त की मां बनी राखी गुलज़ार का संवाद याद आ रहा है- ”जो मांएं अपने बेटों की काली करतूतों पर परदा डालती हैं वे बड़े हो कर खलनायक बनते हैं।” असल ज़िंदगी में मां-बाप की व्यस्तता का असर संजय के जीवन पर पड़ा। बचपन में मा
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डूब मरो हिंदुस्तांवालो, लानत इस खामोशी पर…

नवभारत टाइम्स में छपा ताज़ा लेख हमारी संवेदनहीनता पर प्रहार कर रहा है। लेखक – उमेश स्रोत- नवभारत टाइम्स कर्नल वी . वसंत ने भारत – पाक सीमा पर आतंकवादियों से लड़ते हुए जान दे दी। लेकिन मीडिया के लिए यह खबर नहीं बन सकी। आम भारतीय को जैसे इन
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प्रतिभा पाटिल हां तो किरण बेदी क्यों नहीं?

किरण बेदी देश की पहली महिला आईपीएस ऑफ़िसर हैं. यह भी सही है कि वे देश की ऐसी पहली महिला ऑफ़िसर हैं जो चाहें-करें, उसकी चर्चा मीडिया में ज़रूर होती है. वे पुलिस में ना होतीं तो मीडिया या फिर पॉलीटिक्स में ज़रूर होती. हालांकि वे टेनिस प्लेयर बनने का ख़
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श्श्श्श्श… मुस्लिम

सीएनएन-आईबीएन की प्रख्यात पत्रकार सागरिका घोष ने मुंबई और कोयंबटूर बमकांड के फ़ैसले के परिप्रेक्ष्य में मुस्लिमों को मिल रही सज़ा पर विचारोत्तेजक लेख लिखा है जो शुक्रवार के हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित किया गया है। सागरिका लिखती हैं कि मुंबई बमकां
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डायमंड इन डेजर्ट

नवलगढ़ की कहानी अकेले संजय की नहीं है, बल्कि गांव-देहात के हर उस परिवार की है जहां संसाधनों एवं रोजगार का अभाव परिवार नामक संस्था के भरण-पोषण के लिए एक चुनौती बन जाता है। लेकिन शेखावटी के लोगों के साथ अब ऐसा नहीं है। नवलगढ़ के कस्बाई माहौल में डायमंड
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चुंबक से चिपकी जिंदगी

सरकारी विकास और शिक्षा के प्रसार के तमाम दावों के बावजूद देश में कई समाज ऐसे हैं जिन पर आज भी शिक्षा और विकास की छाया की दरकार है। लोग पुश्तैनी पेशे से जुडे हुए हैं। संतरानगरी नागुपर मे भी एक समुदाय ऐसा ही है। हाथ में लकडी का घमेला, लोहे की कांटेनुमा