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अफसाना लिख रही हूँ - भारत गाथा -२

"चाची, एक और पूडी देना " घर में खाना परोसने का काम बुलबुल था ; बच्चे कभी पूडी कभी सब्जी कभी खीर की मांग किये जा रहे थे | इतनी ख़ुशी थी की हर बच्चा स्वतः ही खाना बड़ी इच्छा से और बड़ी मात्रा में स्नेह से खा रहा था | और इन सबसे दूर बुलबुल के बच्चे विडियो
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कभी नीम नीम कभी शहद शहद - (भारत गाथा -१ )

आज चार बजे आँख खुल गयी ... कल तीन बजे ही सुबह हो गयी थी और परसों तो एक बजे से ही नींद उछन गयी थी | भारत से अमरीका पहुँचते पहुँचते समय बदल जाता है ..... हाँ वाकई समय बदल जाता है | साथ बदल जाती है इंसान की सोच और रवैया | ये बदलाव मैं खुद में महसूस कर रही