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27 जनवरी के पश्चात मौसम में हल्का सा सुधार किन्तु प्रबल शीतलहर से पूर्ण मुक्ति 6 फरवरी के बाद ही.........

संसार में कोई भी व्यक्ति,पदार्थ, जीव इत्यादि आकाशमंडल में भ्रमण कर रहे ग्रहों से अछूता नहीं हैं। सभी कही न कहीं किसी न किसी रूप में इन भ्रमणशील ग्रहों की क्रिया प्रतिक्रिया का परिणाम भी भोग रहे हैं। बल्कि यूँ कहे कि समय के पथ पर निरन्तर गतिमान इन पिंडों
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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निरहू देश को तुम पर नाज है

बुद्धिसागर स्नेही को प्यार से लोग सनेही जी कहते हैं। जब इनके ज्ञान का घोड़ा कुलांचें मारता है तो यह श्रमजीवी या परजीवी टाइप लोगों के बीच देखे जाते हैं और इनके ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं। प्राय: यह उन्ही जगहों पर देखे जाते जहां इनको लोगों की भीड़ हो। एक खास
 
अभिनव उपाध्याय
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वह चाहता है कि खत्म हो जाए ये दुनिया...

वह दो घंटे तक मुझे समझाता रहा कि अब बस तीन साल इस दुनिया की उम्र रह गई है। इसके बाद कुछ भी नहीं बचेगा। सब खत्म हो जाएगा। यह कहते-कहते उसकी आंखें भर आईं। वह कमजोर नहीं कि दुनिया के खत्म होने से डर गया है और रो रहा है बल्कि इस दुनिया में अब तक जो भी उस
 
RAJESH RANJAN