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क्राँति की तलवार - इन्क़लाब ज़िन्दाबाद

शहीद भगत सिंह जन्मदिन पर विशेष अलीपुर बमकाँड के आरोपी श्री यतीन्द्रनाथ दास 63 दिन के  आमरण  अनशन  के  पश्चात   ब्रह्मलीन हो गये  । सँभवतः ब्रिटिश सरकार उनको... पूरा पढ़ें
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नक्सलवादी, आतंकवादी और भगत सिंह

कुहु बिटिया अब हाथी-घोडे की कहानियों से आगे आ गयी है, क्यों न हो वह अब कक्षा दूसरी में जो जाने वाली है। आज मैंने भगत सिंह से उसका परिचय कराया। “बेटा भगत सिंह नें संसद के भीतर बम और आजादी के पर्चे फेंके” मैं कहानी सुना रहा था। ”लेकिन पापा बम क्यों फेंका
 
राजीव रंजन प्रसाद
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क्या आपके पास नक्सलवादी साहित्य है?

कोई दो साल पहले महाराष्ट्र में कहीं एक पुस्तक मेले से एक महिला कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वह नक्सलवादी साहित्य बेच रही थीं। जिन किताबों के चलते उन पर यह आरोप लगाया गया था उनमें मार्क्स-एंगल्स-लेनिन की किताबों के साथ भगत सिंह के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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भगत सिंह, कम्युनिस्ट और गाँधी होने का मतलब

पूंजीपतियों के चाटुकार बुद्धिजीवियों द्वारा जानबूझकर परंतु कुछ पढ़े-लिखे लोगों द्वारा अनजाने में भावुकतावश यह प्रचारित किया जाता है कि गाँधी और भगत सिंह, दोनों आज़ादी के दीवाने थे. उनका मकसद इस देश को अंग्रेजी साम्राज्य से मुक्ति दिलाने तक सीमित था. ले
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आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है

अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम ! भगत सिंह की बात सुनों, नई क्रांति की राह चलो ! मेहनतकश बहनों और भाईयो, 28 सितंबर को महान शहीदे-आजम का 102वाँ जन्मदिन है. शहीदे-आजम के जन्मदिन पर जरूरत है कि हम महज रस्मी श्रद्धान्जलियों से हटकर अपने महबूब श
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हवा में रहेगी ख़यालों की बिजली...

दरजे पांच की हिन्दी की किताब में भगत सिंह पर एक पाठ (सबक यानी लेसन) था। इसकी शुरुआत भगत सिंह के उस ख़त की काव्यपंक्तियों के अनुवाद से होती थी जो उन्होंने फांसी से पहले अपने छोटे भाई कुलतार सिंह को लिखा था। भगत सिंह का नाम हमारे लिए बेहद जाना-पहचाना था और
 
Ek ziddi dhun
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स्वतंत्रता सेनानी और गदर पार्टी के आखिरी चिराग बाबा भगत सिंह बिलगा के निधन पर

स्वतंत्रता सेनानी और गदर पार्टी के आखिरी चिराग बाबा भगत सिंह बिलगा का शुक्रवार इंग्लैंड के बरमिंघम में एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे करीब 102 साल के थे और उनकी सेहत खराब होने के कारण उन्हें कुछ दिन पहले अस्पताल में दाखिल करवाया गया था।बाबा जी क
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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले [भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु की फाँसी पर विशेष आलेख] - अभिषेक सागर

तत्कालीन सेंट्र्ल असेम्बली मे, जिसके अध्यक्ष श्री विट्ठ्लभाई पटेल(सरदार वल्लभभाई पटेल के बडे भाई) थे के सम्मुख अंग्रेज सरकार ने दो बिलो को प्रस्तुत किया था- (1) ट्रेड डिस्प्यूट बिल(औधोगिक विवाद विधेयक) (2) पब्लिक सेफ्टी बिल(जन सुरक्षा विधेयक) इन बिलो
 
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