प्रेम कविता - ( भाग बारह ) (इश्वर से शिकायत भरी )
आजकल कई बार ईश्वर से बहस हो जाती हैं । जीतना तो खैर उसने ही हैं , क्योंकि मेरे पास उसके जितने ताकतवर संत और ज्ञानी नहीं हैं । पूरी दुनिया उसके समर्थन में खड़ी हैं और मैं कुछ गिने चुने दुखी लोगो की तरफ से प्रतिनिधि बना हुआ हूँ । पर फिर भी कोई बात नहीं ,
Jun 04 2010 06:55 AM



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