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पर्यटन के नए और आधुनिक केन्द्र बने मंदिर

भगवान के दर पर बड़ी भीड़ लगी है, मैया के दर पर भक्तों की भारी भीड़ जमा है। वाकई आधुनिकता भरे समाज में जहाँ माता-पिता के सम्मान के लिए किसी के पास समय नहीं है, वहाँ देवी-देव के दर पर जाने वालों की भीड़ बहुत ही अधिक होती जा रही है।संस्कृति-सभ्यता के नाम पर
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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आस्था के बदले डर का सैलाब??

कल एक काम से अपने मित्र के घर जाना हुआ, रास्ते में एक मंदिर पड़ता है हनुमान जी का। मूर्ति का दक्षिण मुख होने के कारण मंदिर के प्रति लोगों की अपनर श्रृद्धा है। मंगलवार तथा शनिवार को बहुत अधिक भीड़ रहती है। इसी तरह से भीड़ को भक्तिभाव में लीन 2 तारीख को ग
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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मुरलीवाले द्वारा शाश्वत सच की बानगी

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लनिर्भवति भारत,अभ्युत्थानमधर्मस्य स्वात्मानं सृजाम्यहम,परित्राणाय साधूनाम विनाशाय च दुष्कृताम,धर्मसंस्थापनार्थाय, संभवामि युगे युगे।
 
उसका सच
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मुरलीवाले का सच

मैं नहीं माखन खायो मैय्या मोरी, मैं नहीं माखन खायो । भोर भयो गऊवन के पीछे, मधुवन मोहि पठायोरी । चार पहर बंशीबन भट्क्यो, साँझ पडी घर आयोरी ॥ मैं नहीं माखन खायो मैय्या मोरी, मैं नहीं माखन खायो । मै बालक बैयन को छोटो,छिको किस विध पायोरी । ग्वाल बाल सब गैला
 
उसका सच
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ताज बेगम

कहते हैं कि मुगलों के ज़माने में दिल्ली में ताज बेगम रहा करती थीं जो शरियत की सीमाओं से अलग खुदा की बंदगी में दिन गुज़ारा करती थीं। जब सच्चे प्रेमी से लौ लग गई तो पूजा पाठ कौन करे, नमाज़ कौन पढ़े? जहाँ प्रेम तां नैम नहीं, तां नहीं बुद्धि विचार।प्रेम मग
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