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सलाम एक ग़रीब की महानता को

आज दिनांक 31.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत बीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक -ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अमर है ?http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_31.htmlसुमन सिन्हा की कविता : तुम्हारे
 
रवीन्द्र प्रभात
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कई उदहारण भी हैं....जिससे यह प्रमाणित होता हैं कि पुनर्जन्म है : नवीन कुमार

श्री नवीन कुमार ( retd. SBI officer ) के कथनानुसार, " Hindu mythology और मेरे विचार से आत्मा नही मरती... पुनर्जन्म ज़रूरी नही कि मनुष्य योनि में ही हो, पर जब पुनर्जन्म है तो मनुष्य और अन्य जीव-जंतुओं में हैं और कई उदहारण भी हैं....जिससे यह प्रमाणित होता
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अमर है ?

नमस्कार!मैं रश्मि प्रभा एक नयी परिचर्चा के साथ आज पुन: उपस्थित हूँ परिकल्पना पर आज उत्सव की यह आखिरी परिचर्चा है और कल गीतों से भरी आखिरी शाम फिर न जाने कब हमें एक साथ एक मंच पर इकत्रित होने का सुयोग प्राप्त होगा...... खैर, विगत डेढ़ महीनों में हम सभी ने
 
रवीन्द्र प्रभात
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कोई जरूरी नहीं कि हर जबाब बोल कर दिया जाए

....कल मैंने प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव की प्रस्तावना की....ऐसे-ऐसे टिप्पणीकारों की टिप्पणियाँ आने लगी जो ब्लोगोत्सव में शामिल ही नहीं हैं ...उसी क्रम में मैंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल ब्लोगोत्सव-२०१० में शामिल प्रतिभागियों और
 
रवीन्द्र प्रभात
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समान्तर मीडिया की दृष्टि से कितनी सार्थक है हिन्दी ब्लोगिंग .......

आज दिनांक 28.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत उन्नीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक -तीन दिवसीय प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव लखनऊ में ....http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_28.htmlयह प्रस्ताव केवल ब्लोगोत्सव-२०१० से जुड़े
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० की आखिरी शाम हिंदी ब्लॉग जगत के लिए एक यादगार शाम होने जा रही है !

आज दिनांक 26.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत अठारहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक-एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दिल दुखाना चाहिए। http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_1497.htmlअजित कुमार मिश्र की दो
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० की आखिरी शाम हिंदी ब्लॉग जगत के लिए एक यादगार शाम होने जा रही है !

नमस्कार !मैं जाकिर अली रजनीश आज  उपस्थित हूँ ब्लोगोत्सव -२०१० के अठारहवें दिन के कार्यक्रम के संचालन-संयोजन-समन्वयन हेतु परिकल्पना पर !आजकल हर कोई जो ब्लोगोत्सव से जुडा है व्यस्त है इस उत्सव की आखिरी यादगार  शाम की तैयारी
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम

आदरणीय मित्रों,स्थानीय स्तर पर उत्पन्न अपरिहार्य व्यवधान के फलस्वरूप ब्लोगोत्सव-२०१० के सत्रहवें दिन का कार्यक्रम अचानक स्थगित करना पडा, जिससे आपको असुविधा हुई ! यह हमारे लिए अत्यंत खेद का विषय है ....!आपको यह जानकर वेहद ख़ुशी होगी कि समस्त व्यवधान दूर
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत कार्यक्रम में अवरोध हेतु हमें खेद है

प्रिय मित्रों,ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत दिनांक २१.०५.२०१० को होने वाले कार्यक्रम अचानक नेटवर्क में हुई गडबडियों के कारण स्थगित करना पड़ रहा है , तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सरबर में अचानक समस्या उत्पन्न होने के कारण अवरोध की यह
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत आज के कार्यक्रम में कर्यक्रम में अवरोध हेतु हमें खेद है

प्रिय मित्रों,ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत दिनांक २१.०५.२०१० को होने वाले कार्यक्रम अचानक नेटवर्क में हुई गडबडियों के कारण स्थगित करना पड़ रहा है , तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार सरबर में अचानक समस्या उत्पन्न होने के कारण अवरोध की यह
 
रवीन्द्र प्रभात
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कलाकार को स्वतंत्रता नही होती कि किसी के आराध्य देव की पेंटिंग्स में न्युड बनाया जाए :डॉ.डी.डी.सोनी

स्वागत है पुन:आपका परिकल्पना पर.... हमारे साथ  लगातार बने हुए हैं देश के प्रख्यात चित्रकार डॉ.डी.डी.सोनी....आईये - उसी कड़ी को आगे बढाते हुए चलते हैं और उनसे कुछ प्रश्नों के जवाब लेते है।अभी भारत में चित्र कला को लेकर विवाद काफ़ी
 
रवीन्द्र प्रभात
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अगर आपको आगे बढ़ना है तो डिमांड पर काम करना भी आना चाहिए.

स्वागत है आपका पुन: परिकल्पना पर आईये सोनी जी के साथ बातचीत का यह क्रम आगे बढाते हैं -   शायद इसे ही कहते हैं "हपट परे तो हर-हर गंगे", हा हा हा.......वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि चित्रकारी पर संकट मंडरा रहा है. हाई रेजुलेशन कैमरे
 
रवीन्द्र प्रभात
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मित्रों मै ललित शर्मा, आज उपस्थित हूँ परिकल्पना पर...

मित्रों  मै ललित शर्मा ! आज उपस्थित हूँ ब्लोगोत्सव-२०१० के सोलहवें दिन के कार्यक्रम के संयोजन-समन्वयन और संचालन हेतु परिकल्पना पर !========================================================== आईये सबसे पहले उत्सव का आरम्भ देवताओं के आह्वान से...
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के पन्द्रहवें दिन का कार्यक्रम

आज दिनांक: १७.०५.२०१० को ब्लोगोत्सव-२०१० के पन्द्रहवें दिन प्रकाशित पोस्ट के लिंक- विश्व के हर देश में फलित है ये हिंदी ब्लॉग जगत :रेखा श्रीवास्तव http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_16.htmlविवेकानंद पाण्डेय की देश के अमर सपूतों की श्रद्धांजलि
 
रवीन्द्र प्रभात
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इमरोज़ मुबारक हो !

ब्लोगोत्सव के तेरहवें दिन परिचर्चा अधूरी रह गयी थी . समयाभाव के कारण हम नीलम प्रभा जी की अभिव्यक्ति को शामिल नहीं कर सके, इसलिए चौदहवें दिन का कार्यक्रम शुरू हो इससे पहले आईये नीलम प्रभा जी की अभिव्यक्ति को उसी परिचर्चा की आखिरी कड़ी के रूप में शामिल
 
रवीन्द्र प्रभात
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अंग्रेजी की तरह हिंदी ब्लोगिंग को भी अपनी पकड़ मजबूत बनानी होगी : अमरजीत कौर

आज दिनांक 12.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत तेरहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक-.........इमरोज़ का अर्थ जो हो , पर मेरी दृष्टि में इसका अर्थ है 'प्यार' : रश्मि प्रभा http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_11.htmlअंग्रेजी की तरह
 
रवीन्द्र प्रभात
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ऐसा एहसास ऐसी तपिश हर रोज हमारे घर आए :नवीन कुमार

अभूत अनुभूति -इक रोज़ हमारे घर आएइमरोज़ हमारे घर आएऐसा एहसास ऐसी तपिशहर रोज हमारे घर आएइमरोज़ हमारे घर आएऐसा जूनून ऐसी कशिशरोज-रोज हमारे घर आएइमरोज़ हमारे घर आए.........नवीन कुमार पटना ==========================एक ख्यालजो रेखाओं में थानज्मों और गीतों में
 
रवीन्द्र प्रभात
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इमरोज़ - मोहब्बत औ जहाँ मोहब्बत वहाँ खुदा : प्रिया चित्रांशी

एक रिश्ते की तरंगदैर्ध्य*अमृता - अल्फाज़इमरोज़ - हर्फ़ अमृता - नज़्म इमरोज़ - रूह-ए-नज़्म अमृता - क़लमइमरोज़ - कागज़ अमृता - कैनवसइमरोज़ - रंग अमृता - पानी इमरोज़- प्यास अमृता - सफ़र इमरोज़ - चाल अमृता - ग्रन्थ इमरोज़ - सार अमृता - नमाज़ इमरोज़ -
 
रवीन्द्र प्रभात
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काश एक इमरोज मेरी भी ज़िन्दगी में होता......रानी मिश्रा

काश एक इमरोज.........काश एक इमरोज मेरी भी ज़िन्दगी में होता......तो जीने का फलसफा ही कुछ और होता,मैं चलती, मेरे संग संग चलता वो......जो रूकती, तो पल भर को ठहर जाता वो भी,हर अश्रु को मोती बना देता वो.....जो रोती तो पल भर को सहम जाता वो भी,मैं हंसती
 
रवीन्द्र प्रभात
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लोग आरती उतारते हैं मैंने इक नज़्म उतारी है :अनिल 'मासूम

जब कविता मेंइन्द्रधनुषी रंग घुलने लगें,एक स्पंदित चित्र उभरने लगे,तो संशय न करना ---जो व्यक्ति काव्य में,जीवित है,वो "इमरोज़" ही है---जब चित्रों के मौन में,शब्द गूँजने लगें,प्रेम घोलने लगें,आसक्ति से विद्रोह कर,अनुरक्ति बोलने लगे,समझो कि-----चित्रों में
 
रवीन्द्र प्रभात
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.........इमरोज़ का अर्थ जो हो , पर मेरी दृष्टि में इसका अर्थ है 'प्यार' : रश्मि प्रभा

मैं समय हूँ !आज लेकर उपस्थित हूँ एक और परिचर्चा : इमरोज के बारे में जी हाँ वही इमरोज, जिन्होंने प्रेम की एक नयी परिभाषा गढ़ी , जिन्होंने दिए मेरे  दस्तावेज को अनगिनत रचनाएँ और उकेरे वर्त्तमान के पन्नों पर  श्रेष्ठ चित्र
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : एक संभावना हो तुम !

आज ब्लोगोत्सव-२०१० के ग्यारहवें दिन अर्थात दिनांक ०७.०५.२०१० को प्रकाशित पोस्ट का लिंक -ब्लोगोत्सव-२०१० : एक संभावना हो तुम ! http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_2018.htmlवर्चुअल टेक्नोलोज़ी में जबरदस्त सामर्थ्य है : गौहर
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : आज देखिये रश्मि प्रभा की आँखों से उत्सव के दृश्य

आज दिनांक ०५.०५.२०१० को ब्लोगोत्सव -२०१० के अंतर्गत होने वाले समस्त कार्यक्रमों के लिंक- ब्लोगोत्सव-२०१० : आज देखिये रश्मि प्रभा की आँखों से उत्सव के दृश्य http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_04.htmlआकाश मेरी मुठ्ठी से
 
रवीन्द्र प्रभात
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समय की गतिशील धुरी पर परिकल्पना ने त्रिकाल दर्शन करवा दिए :सरस्वती प्रसाद

ब्लोगोत्सव-२०१० में आज :  नौवें दिन अर्थात दिनांक ०३.०५.२०१० के संपन्न कार्यक्रम का लिंक-आज किसी भी संस्कृति की शुचिता की बात करना बेमानी ऒर ग़ॆरजरूरी हॆ...! http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post.htmlसाहित्य ऒर संस्कृति को हाशिए की ओर धकेलने
 
रवीन्द्र प्रभात
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हमें गर्व है हिंदी के इन प्रहरियों पर -2

विदेशों  में  बसे हिंदी सेवी की चर्चा के दौरान पिछले पोस्ट में आप सभी ने सुश्री पूर्णिमा वर्मन : संयुक्त अरब इमारात (यूएई) / श्री सुमन कुमार घई : कनाडा / श्री तेजेन्द्र शर्मा :
 
रवीन्द्र प्रभात
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आज किसी भी संस्कृति की शुचिता की बात करना बेमानी ऒर ग़ॆरजरूरी हॆ...!

"आज किसी भी संस्कृति की शुचिता की बात करना बेमानी ऒर ग़ॆरजरूरी हॆ ।हमें अपनी ऒर अपने आस-पास की जीवन शॆली पर भी ध्यान देना होगा ।उसके तिरस्कार ऒर स्वीकार करने वालों के मंसूबों को समझना ऒर परखना होगा । यूं भी आज राजनीति पूरी तरह हावी हॆ ऒर उसका अधिकांश
 
रवीन्द्र प्रभात
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शमा की कहानी : नीले पीले फूल

शमा एक ऐसा नाम जो अपनी रचनात्मकता से सबको रोशन करने की प्रतिबद्धता के साथ हिंदी चिट्ठाकारिता में सक्रिय है ...वह कवियित्री भी है और कथाकार भी, किन्तु इन सबसे इत्तर इनकी पहचान एक संवेदनशील सृजनधर्मी के रूप में भी है ....प्रस्तुत है इनकी कहानी -नीले पीले
 
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किसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना

आज दिनांक 30.04.2010 को ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत प्रकाशित पोस्ट का लिंककिसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना :इमरोज़ http://www.parikalpnaa.com/2010/04/blog-post_9889.htmlब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते
 
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किसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना :

आज दिनांक 30.04.2010 को ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत प्रकाशित पोस्ट का लिंककिसी उपनिषद की तरह है यह परिकल्पना :इमरोज़ http://www.parikalpnaa.com/2010/04/blog-post_9889.htmlब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते
 
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हमें गर्व है हिंदी के इन प्रहरियों पर -1

विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जुड़े हिन्दी-प्रेमी () सुश्री पूर्णिमा वर्मन : संयुक्त अरब इमारात (यूएई) संपादक : विश्वजाल पत्रिका अभिव्यक्ति एवं अनुभूति            () श्री सुमन कुमार घई : कनाडा संपादक : विश्वजाल
 
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ब्लोगोत्सव-२०१० : बच्चे भी तो बेरौनक जगह जाना नही चाहते ना अब

भई, अबके गर्मियों की छुट्टियों मे हिंदुस्तान मे ही कहीं चलेंगे। परदेस चलने का कुछ मूड नहीं बन रहा!"सुबह बाथरूम मे खड़ा विपुल शेव करते करते अपनी पत्नी नीरा से बतियाने लगा। कुछ देर उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर फिर आगे बोल पडा ,"सोंचता हूँ,पहले तो शिमला
 
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ब्लोगोत्सव-२०१० : ग्यारह बजे भी बिस्तर छोडे तो क्या फर्क पड़ जायेगा?

आँखें खुलीं तो पाया आँगन में चटकीली धुप फैली है.हडबडाकर खाट से तकरीबन कूद ही पड़ा.लेकिन दुसरे ही क्षण लस्त हो फिर बैठ गया.कहाँ जाना है उसे?,किस चीज़ की जल्दबाजी है भला? आठ के बदले ग्यारह बजे भी बिस्तर छोडे तो क्या फर्क पड़ जायेगा? पूरे तीन वर्षों से बेकार
 
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ब्लोगोत्सव-२०१० : ये बेचारा हृदय की जन्मजात् बीमारी की वज़ह से नीला पड़ चुका है

“तुम्हारे रतलाम के डॉक्टर डॉक्टर हैं या घसियारे?” एमवाय हॉस्पिटल इन्दौर के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल भराणी ने मरीज को पहली ही नज़र में देखते हुए गुस्से से कहा. इकोकॉर्डियोग्राफ़ी तथा कलर डॉपलर स्टडी के ऊपरांत डॉ. भराणी का गुस्सा और उबाल पर था - “ये
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : क्या वह भौतिक पदार्थों के मोह से ऊपर उठ चुका है ?

बस से उतर कर शिवदास को समझ नहीं आ रहा था कि उसके गांव को कौन सा रास्ता मुड़ता है । पच्चीस वर्ष बाद वह अपने गाँव आ रहा था । जीवन के इतने वर्ष उसने जीवन को जानने के लिए लगा दिए, प्रभु को पाने के लिए लगा दिए । क्या जान पाया वह ? वह सोच रहा था कि अगर कोई उससे
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : आपको इंतज़ार था, लीजिये हम आ गए .........!

गर्म हवा के झोंके उदंडता पर उतारू होकर खिड़की किवाड़ पीट रहे थे ! पिघलती धूप में प्यासे कौवे की काँव  काँव  में घिघिआहट भरा विलाप शामिल था . मैं घर के काम-धाम से निबटकर हवा की झाँय-झाँय , सांय- सांय को अन्दर तक महसूसती अपने कमरे में लेटने की
 
रवीन्द्र प्रभात
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श्रीमती सरस्वती प्रसाद की कहानी : मूढीवाला

कवि पन्त की मानस पुत्री श्रीमती  सरस्वती प्रसाद जी का जन्म आरा (शाहाबाद) में हुआ . इन्होने १९६३ में हिंदी प्रतिष्ठा के साथ स्नातक की शिक्षा ली .  पुस्तकें पढ़ने से गहरा लगाव , कलम हमजोली बनी , अपनी भावनाओं को कविता , कहानी और संस्मरण का रूप
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : आज का दिन कुछ ख़ास है

मैं समय हूँ !आज फिर उपस्थित हूँ ब्लोगोत्सव-२०१० में, क्योंकि आज का दिन कुछ ख़ास है .पारस्परिक सद्भावना को प्रश्रय देने वाले इस उत्सव में आज शामिल हो रहे हैं भारतीय साहित्य के एक ऐसे स्तंभ जिनकी आभा से ददीव्यमान है हमारी शाश्वत संस्कृति ...!आज मैं हतप्रभ
 
रवीन्द्र प्रभात
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जड़ से विच्छिन्न लेखन की आयु बहुत छोटी होती है : श्री कृष्ण बिहारी मिश्र

‘माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय‘ द्वारा डी.लिट की मानद उपाधि,  ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान‘ के ‘साहित्य भूषण पुरस्कार‘, ‘कल्पतरू की उत्सव लीला, हेतु भारतीय ज्ञानपीठ के ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार‘ से सम्मानित श्री कृष्ण
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत सातवें दिन प्रकाशित पोस्ट........

...आज दिनांक २८.०४.२०१० को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत सातवें दिन प्रकाशित पोस्ट........ब्लोगोत्सव-२०१० : ऑनलाइन विश्व की आजाद अभिव्यक्ति है ब्लोगिंगहिंदी ब्लोगिंग के संवंध में क्या कहते है बालेन्दु शर्मा दाधीचब्लोगोत्सव-२०१० :दर्पण का
 
रवीन्द्र प्रभात
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ब्लोगोत्सव-२०१० : आज हम लेकर आये हैं श्यामल सुमन की ग़ज़ल

कहा गया है कि ग़ज़ल की असली कसौटी प्रभावोत्पादकता है . ग़ज़ल वही अच्छी होगी जिसमें असर और मौलिकता हो, जिससे पढ़ने वाले समझे कि यह उन्ही की दिली बातों का वर्णन है.  हिन्दी वालों ने ग़ज़ल को सिर्फ स्वीकार हीं नही किया है , वल्कि उसका नया सौन्दर्य
 
रवीन्द्र प्रभात