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नुक्कड़ पर आया नीशू तिवारी .......ब्लोगिंग को सार्थकता की ओर ले जाने की है तयारी .......( आप सब के बिना हम नहीं अविनाश जी ......) ........एक नयी पहल .

कभी कभी कुछ ऐसा हो जाता है.....जिसकी हम उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं .......पर हमें बाद में पछतावा जरूर होता है.......पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है..........( दिल्ली ब्लोगर सम्मलेन को लेकर )....वैसे भी क्या हम अपने से बड़ों के बिना आगे
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क्या आप ब्लोगिंग नाम के नशे के शिकार हैं ----ज़रा सोचिये ---

सूत न कपास , जुलाहों में लट्ठम लट्ठा ! अनिल पुसदकर जी की यह पोस्ट पढ़कर , बहुत दिनों से जो मैं महसूस कर रहा था और एक बार एक व्यंग लेख के रूप में इशारा भी कर चुका हूँ , आज खुल्लम खुल्ला लिखने का मन कर रहा है ।मेडिकल प्रोफेशन , ब्लोगिंग , कवितायेँ , हास्य
 
डॉ टी एस दराल
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बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के हाँ जी हाँ जी कहना

कुतिया ले गई बाघ को धर के,हाँ जी हाँ जी कहना।बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,हाँ जी हाँ जी कहना॥कोई कविता करे पोस्ट में,कोई लिखे कहानी।कोई लिखे कुछ ऐसा यारों,समझ नहीं जो आनी।ब्लोगर लिखते चिंतन कर के,हाँ जी हाँ जी कहना।बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के,हाँ जी हाँ
 
जी.के. अवधिया
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ब्लोगिंग के गुर सीख लिये हम .. प्रयास एक वर्णिक छंद रचने का

एक विचार आया कि क्या मैं एक वर्णिक छंद की रचना कर सकता हूँ? वह भी ब्लोगिंग के ऊपर? आपको पता ही है कि मैं कोई कवि नहीं हूँ। वैसे लेखक, साहित्यकार या पत्रकार भी नहीं हूँ। फिर भी प्रयोग के रूप में एक वर्णिक छंद रचने के प्रयास में जुट गया। सोचा कि
 
जी.के. अवधिया
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ब्लोगिंग की समस्यायें

तीन चार रोज पहले पाबला जी ने मुझे फोन करके बताया कि वे मेरे ब्लोग पर टिप्पणी नहीं कर पा रहे हैं। मैंने समझा कि शायद ब्लोगर में कोई अस्थाई समस्या होने के कारण ऐसा हुआ हो अतः उनसे अनुरोध किया कि कुछ समय बाद नये ब्राउजर में मेरा पोस्ट खोल कर टिप्पणी करने का
 
जी.के. अवधिया
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मैं ब्लोगिंग क्यों करता हूँ

कोई भी व्यक्ति यदि कुछ करता है तो उस कार्य का कुछ न कुछ उद्देश्य अवश्य ही होता है। मैं भी यदि ब्लोगिंग करता हूँ तो मेरा भी अवश्य ही कुछ न कुछ उद्देश्य होना ही चाहिये। मैं न तो कवि हूँ, न लेखक और न ही पत्रकार। याने कि लेखन से मेरा कुछ विशेष सम्बन्ध नहीं
 
जी.के. अवधिया
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" ब्लोगिंग के खतरनाक वायरस जिससे डरते हैं ब्लोगर "

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आप लोगो ने वायरस,वायरस,और वायरस जो की हमें और आपको बहुत परेशान करता है कभी-कभी । अब आप लोग कहेंगे कि ये वायरस ब्लोगिंग में कैसे और ब्लोगर भला क्यों डरने लगे। लेकिन भाई सच्चाई तो यही है कि ब्लोगर भी इससे डरते हैं और ब्लोगरो ने
 
Mithilesh dubey
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पोस्ट का पहला अक्षर बड़ा बनाएं

आ ज इस पोस्ट में आपने कुछ अलग नोटिस किया , जी हाँ पहला अक्षर , इस पोस्ट का पहला अक्षर बड़ा है , बहुत दिनों से अपने ब्लॉग की स्टाइल शीत पर कोई काम नही किया था , वडनेरकर जी के सफर में पोस्ट के शुरुआत हमेशा बड़े अक्षर से ही होती है , बचपन से अखबार की सम
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हिन्दी में लिखने के ऑफ़ लाइन टूल

हिन्दी में लिखने वालों की एक बड़ी दिक्कत रही है हिन्दी में आफलाइन लिखने की , हर बार ब्लॉग पोस्ट करने के लिए इन्टरनेट से जुड़ना ज़रूरी हो जाता है , असीमित ब्रॉडबैंड कनेक्शन वालों के लिए तो ठीक है पर जो लोग असीमित इन्टरनेट का प्रयोग नही कर रहे हैं उनके
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किसी भी साईट से लिंक करने से पहले एक बार ज़रूर देखें

अगर आपको गूगल एडसेंस से विज्ञापन मिले हुए हैं तो किसी भी साईट से अपने ब्लॉग या साईट को जोड़ने से पहले देखलें की कहीं वो गूगल एडसेंस या गूगल सर्च इंजन से प्रतिबंधित तो नही है क्योंकि ऐसा होने पर आपको भी इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है और अपने विज्ञापन