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कुछ तो है उस दंडधारी शख्स में ....?

पता नहीं ? क्यों पर गाँधी जी मुझे किसी ना किसे कारणवश आकर्षित करते रहे हैं ....... पर शायद अनुयायी बनने की हद तक तो नहीं ! कुछ तो उस दंडधारी शख्स  में है जो सत्य और अहिंसा की बातें करते हुए आम आदमी की हद से आगे बढ़ता हुआ चला जाता है | बाकी असहमत
 
प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI
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निंदक-वंदना का विवेक-सत्‍य

निंदक नियरे राखिये' की लुकाठी लेकर कबीर ने आत्‍म परिष्‍कार की राह के अनगिनत गड़बड़ झाले जला डाले। ब्‍लागरी के कबीरदास भी इसी मति के विवेकी गुरूघंटाल हैं । कबीर ने तो खुद को कहा था, 'जाति जुलाहा मति का धीर' । इस ब्‍लागर कबीर की मति का ही अनुमान लगायें
 
हिमांशु