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हिंदी ब्लॉगजगत में कोई गुटबाजी नहीं है…

जैसे पूरा हिन्दुस्तान विभिन्न कला-संस्कृति, बोल-चाल, रहन-सहन के आधार पर बंटा हुआ है. उसी प्रकार यह समूचा ब्लॉग-जगत भी है. मेरा अनुभव यही कहता है की यहाँ कोई गुटबाजी नहीं है. ऐसा कुछ दिखना एक स्वाभाविक परिणति है. तेजी से बढती हुई ब्लोगेरों की भीड़ को हम
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टिप्पणी के बिना कोई ब्लॉग कैसे लिखे (Hasya Vyangya)

आपने जो अनुभव किया वो कह दिया मैंने जो अनुभव किया वो कह दिया   एक तराजू में सबको हम तोल सकते नहीं टिप्पणी के बदले टिप्पणी मोल सकते नहीं खुश वो हैं जिन्होंने इसे टाइम पास लिया घर दफ्तर समाज को मगर ख़ास लिया तकलीफ में आज वो सिर्फ बिचारे हैं जो फुलटाइम
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