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विश्व पुस्तक मेला में मित्रों से मिलना

राजकमल से छपेगा शब्दों का सफर बी ते तीन दिनों से हम शब्दों का सफर से छुट्टी पर थे। नेशनल बुक ट्रस्ट के द्विवार्षिक आयोजन विश्वपुस्तक मेला देखने की बड़ी इच्छा थी। दिल्ली में रहते हुए भी इसे देखने का कभी योग नहीं बना। इस बार एक खास वजह से इस आयोजन में शरीक
 
अजित वडनेरकर
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राष्ट्रीय संगोष्टी : हिन्दी ब्लागिरी के इतिहास का सब से बड़ा आयोजन

चित्र मसिजीवी जी से साभार आखिर तीन दिनों से चल रहा भ्रम दूर हो गया कि इलाहाबाद में हिन्दी ब्लागरों का कोई राष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा था।  बहुत लोगों के पेट में बहुत कुछ उबल रहा था। लगता है वह उबाल अब थम गया होगा। यदि नहीं थमा हो तो इस पोस्ट को पढ़
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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शिव जी का क्रोध और कैथोलिक यूनिवर्सिटी

आप सब को याद होगा की कुछ दिन पहले ब्लोग-मित्र आशीष जी ने पोस्ट लिखकर आस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी की साईट में हिंदी ब्लोगों की उपस्थिति पर टिप्पणी की थी ..मैंने देखा वहां बहुत से ब्लॉग थे ..देखकर अनदेखा कर गई ..दो-तीन दिन पहले हमारी शिव जी से चैट पर
 
लवली कुमारी / Lovely kumari