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अखिर ये किसका पैदाईस है।

मैं ब्लागर नही हू ब्लागिग नही करता हू लेकिन बिकाउ मिडीया के समाचार देखने और पढ़ने से ज्यादा अच्छा ब्लागरों के ब्लाग को पढ़ना लेकिन कुछ दिन से देख रहा हू कि ब्लागर जगत में एक भूचाल सा दिख रहा है गालि-गलैज के द्वारा अपने अपने खानदान के व्यक्तित्व का
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हमारे साथ हरिभूमि में ही हैं एक दर्जन ब्लागर पत्रकार

छत्तीसगढ़ में ब्लागरों की बाढ़ आई हुई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा। छत्तीसगढ़ का डंका और ब्लाग जगत में बज रहा है और यह बात सभी जानते हैं। हम बता दें कि हमारे साथ हरिभूमि में काम करने वाले करीब एक दर्जन पत्रकार मित्र ब्लागर हैं। इनमें से कुछ नियमित लिखते
 
राजकुमार ग्वालानी
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मिले ब्लागर होली में-------कवि योगेन्द्र मौदगिल--अभनपुर में........(ललित शर्मा)

कल होली की पूर्व संध्या पर कुछ ब्लागर बिना किसी निश्चित कार्यक्रम के मिल लिए......... ..राजकुमार सोनी जी छुट्टी थी उन्हें अपनी माता जी से मिलने दुर्ग जाना था.....उनका फोन मेरे पास आया और पूछा कि दुर्ग चलेंगे क्या? मैंने हां कर दी बहुत दिन हो गये थे अपने
 
ललित शर्मा
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आ गए छुट्टी से-लेकिन एक समस्या है!!(ललित शर्मा)

सभी को नमस्कार, अब हम छुट्टी से लौट आये हैं. कुछ दिन दिनों बाद. इन दिनों में ब्लाग गंगा में बहुत कुछ बह गया. उसे प्राप्त करने के लिए समय चक्र पर फिर मुझे वापस लौटना पड़ेगा कुछ दिनों के लिए और जो छुट गया है उसे पढ़ना चाहता हूँ. क्योंकि पिछला पढ़ना भी
 
ललित शर्मा
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शराबी-शराबी से कब चिढ़ता है?

कोई शराबी भी किसी शराबी से चिढ़ सकता है, यह बात गले उतरने वाली नहीं लगती है। लेकिन ऐसा होता है। हमारे एक मित्र ने बताया कि किसी शराबी को तब काफी बुरा लगता है जब कोई सुबह-सुबह उसके घर पर पीके आ जाता है। ऐसे में उस शराबी की बातें सोचनीय रहती है। वह काफी
 
राजकुमार ग्वालानी
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ब्लागर की भावना का फर्जी एनकाउंटर

हिंदी ब्लाग की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह सवाल बहस का विषय बनता जा रहा है कि अनाम टिप्पणीकारों को कितनी आजादी दी जाए ? सुलझे ब्लागर अपनी पोस्ट पर पक्ष-विपक्ष में की गई तमाम टिप्पणियों का तहेदिल से स्वागत करने को हमेशा उत्सुक रहते हैं। लेकिन पहचान छिप
 
रंजन राजन
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जो बिलबिलाए...उहे है बिलागर ..खांटी बिलागर...

देखिये जी आप एकदमे ठीक समझ रहे हैं.....हमहुं संगम सम्मेलन का ही कौनो बवंडर पर सवार होकर एक ठो पोस्ट ठेलने की तैयारी कर बैठे हैं। देखिये देखिये अब ई मत कहियेगा कि आपहु शूरू हो गये....आप तो गईबे नहीं किये थे...अरे जाना छोडिये आप लोगन को बुलाया भी नहीं
 
अजय कुमार झा
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तड़का लगा हेडिंग का ................................पर लेखन में मसाला कहां है ब्लागर बंधु ............???????? क्या कहते हो ?

भई कुछ लोगों को आजकल गुटबंदी का शौक चर्राया है मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है । आपका विचार जिस भी तरह का हो उससे प्रेरित लोग आप से जुड़ेंगे । लेकिन गुटबंदी का सबसे बड़ा दुस्प्रभाव तब नजर आता है जब किसी एक ब्लागर के खिलाफ इसका प्रयोग किया जाता है । वैसे
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नापसंद के चटके वाला बाक्स बैर ही पैदा करेगा

ब्लागवाणी वालों ने ऐलान किया है कि अब पसंद के साथ नापसंद के चटके वाला भी एक बाक्स बनाया जाएगा। एक तो सोचने वाली बात यह है कि इस बक्से की जरूरत क्या है? अगर ऐसा किया जाता है तो यह बात तय है कि इस बक्से से फायदा तो नहीं होगा बल्कि उल्टे ब्लागरों के बीच
 
राजकुमार ग्वालानी
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आपके अहम दिन के लिए ‘ये’, समीर लाल जी

‘.....यूँ ही कभी शौकिया लेखन शुरु किया था, आम हल्की फुल्की भाषा में लिखता गया. जब जो मन में आया, लिख दिया. सबने बहुत उत्साहित किया, सम्मानित किया, स्नेह दिया और मैं अपनी ही रौ में बहता लिखता चला गया’। जब मन भर आता है उसका तो उसकी कलम से ऐसे शब्द निकल आते
 
Nitish Raj
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एक पत्र जिसमें अनेक ब्लागरों की समस्या को उठाया है ............................... समीर लाल जी यहां भी छाये हुए हैं क्या बात है ?

प्रिय मित्र , सादर नमस्ते । आपका पत्र ( मेल ) मिला बहुत ही सुखद अनुभूति हुई । कम से कम इतने बड़े ब्लागर समूह में आप की कृपा दृष्टि हम पर कायम है । आप से मैंने टिप्पणी के बदले टिप्पणी और पसंद के बदले पसंद देने की बात की थी पर आपने तो सौदे की शर्तों का
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यह पोस्ट केवल महिलाओ के लिए है ........................नारी आखिर क्या ? विश्व महिला दिवस से पूर्व चर्चा ।

मीडिया व्यूह ( तब इस ब्लाग की कल्पना मात्र थी ) द्वारा शैलेश भारतवासी ( हिन्द युग्म) और मनीष वंदेमातरम ( हिन्दी कवि ) के सहयोग से तैयार " प्रश्नचिंह" नामक प्रश्नावली द्वारा सर्वे किया गया था ( यूइंग क्रिश्चियन कालेज, इलाहाबाद ) । दस प्रश्नों की प्रश्