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ऐसी कोई तकनीक है ही नहीं जो यह सिद्ध कर दे कि बेनामी और फर्जी आईडी से की गई टिप्पणियों के टिप्पणीकर्ता को पहचाना जा सके

"शास्त्री जी आपने लिखा है कि “ओ छत्तीसगढ़ के महारथी! क्या तुम्हारा नाम ब्लॉग-जगत् को बता दूँ?” पर अभी जब मैं यह पोस्ट पढ रहा हूं तब तक उस रथी का नाम सामने नहीं आया। न आना था ना आयेगा और दो कदम आगे बढकर मैं यह कहता हूं कि कोई ऐसी तकनीक है ही नहीं जो यह
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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ब्‍लॉगरों पर साढ़े साती शनी : और हम हिन्‍दी के भविष्‍य के लिए कुछ भी नहीं कर पाए.

आप सभी इस बात से वाकिफ हैं कि हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत से परे अंग्रेजी व हिन्‍दी वेब जगत में ज्‍योतिष का चहुंओर बोलबाला है. गूगल सर्च पर धका-धक ज्‍योतिष से संबंधित वेबसाईट खोजे जा रहे हैं और आनलाईन कुण्‍डली बनवाकर फलित बांचा जा रहा है. मूंदरी-गंडा-ताबीज आनलाईन
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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मुफ्त में अपने ब्‍लॉग का ट्रैफिक बढावें - जुगाड तकनीक

पिछले दिनों मैंनें अपने इस ब्‍लॉग में एवं दो अन्‍य ब्‍लॉग में विभिन्‍न वेबसाईटों के सहारे लगाए जा रहे चटकों का लेखाजोखा लिया तो पाया कि ब्‍लागवाणी के बाद मेरे ब्‍लॉग में  दूसरे क्रम पर गूगल के ईमेज सर्च से ट्रैफिक का बहाव है. यह कहा नहीं जा सकता कि
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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शास्त्रीयता की कसौटी में खरा उतरने को उद्धत हिन्दी ब्लागिंग

किसी भी भाषा की परम्परा रही है कि कोई लेख, कविता, कहानी या अन्य विधा लेखन की शास्त्रीयता की कसौटी मे तुल कर साहित्य की श्रेणी मे स्वीकार कर ली जाती है और उसे तथाकथित सहित्यिक मठाधीशो को भी किंचित ना-नुकुर के बावजूद भी स्वीकार करना पडता है. मठाधीशो
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari