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ब्‍लागिंग वाले गुन्‍डो के बीच फंसी चिट्ठाकारी

हिन्‍दी चिट्ठाकारी आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, आज एक दूसरे की टांग खिचाई और भद्द मचाने मे लगे हुये है। आज हिन्‍दी ब्‍लागरो मे एक ऐसी प्रतियोगिता मची हुई है कि कौन किस पर कितना कीचड़ उछाल सकता है ? कौन किसको कितनी गाली दे सकता है ? क्‍या इन
 
महाशक्ति
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जिन चिट्ठों से मेरा नाता है ्वो आपका तो नही ...!

Deshkaal.com Welcomes you http://www.deshkaal.com/ http://blog.shivrajsinghchouhan.in/ eVishwa http://www.evishwa.com/index.php!! लाल और बवाल --- जुगलबन्दी !! - 11 अनुसरणकर्ताhttp://lal-n-bavaal.blogspot.com/!!♥๑۩۞۩ ๑मन-दर्पण๑۩۞۩๑♥!! - 54
 
गिरीश बिल्लोरे
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एक ब्‍लागर था पंगेबाज

चिट्ठाकारी मे कोई व्‍यक्ति मेरे सबसे नजदीक रहा है तो उनमे से एक नाम फरीदाबाद स्थित अरूण अरोड़ा जी का नाम है। अरूण जी के साथ चिट्ठकारी मे काम करने का अपना ही अलग आनंद था, अत्‍मीयता थी। अपने से आधे उम्र के लड़के का सम्‍मान देने की क्षमता थी तो कुछ गम्‍भीर
 
महाशक्ति
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फागुन में जरा सा तुम महक जाओ !! (ललित शर्मा)

फागुनी मौसम हो गया है....प्रकृति ने अपनी मनोरम छटा बिखेर दी है....... कल शाम को खेतों की तरफ गया था तो देखा कि वातावरण में भीनी-भीनी खुशबु है जो मद मस्त कर दे रही है....... डूबते हुए सूरज की छटा निराली है. ऐसे उनका याद आ जाना गजब ढा गया........कभी इन
 
ललित शर्मा
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ब्लाग दुआरे सकारे गई उहाँ पोस्ट देखि के ही मन हुलसे

ब्लाग दुआरे सकारे गई उहाँ पोस्टन देखि के मन हुलसे अवलोकत हूँ कभी सोंचत हूँ अब कौन सा पोस्ट पढूँ झट सेघूंघरारी लटें समरूप  दिखें  कविता ग़ज़लें लगि झूलन सीकहीं नज़्म दिखे कुछ मुक्तक हैं  कई पोस्ट पे स्निग्ध कपोलन सी  परदन्त की पंगति कथ्य
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ब्लाग किसलिये है? (अपने रिस्क पर पढें)

कृप्या इस लेख को किसी अवधारणा को दिमाग में रखकर ना पढें।  मुझ गधे के दिमाग में कुछ विचार आये तो यहां लिख दिये हैं। गधे के दिमाग में विचार आते हैं और वो ढेंचू-ढेंचू करने  ही लगता है। किसी भी ब्लागर या नान ब्लागर से इस वार्तालाप का कोई भी सम्बन्ध
 
अन्तर सोहिल
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वन्य जीव संरक्षण व इतिहास का नया न्यूज पोर्टल- दुधवा लाइव

भारत की जैव-विविधिता के अध्ययन व संरक्षण के लिए दुधवा लाइव न्यूज पोर्टल http://www.dudhwalive.com की शुरूवात हो रही है। जहाँ आप सभी उन्मुक्त विचारों की नितान्त आवश्यकता है। यह पोर्टल वन्य-जीवन, ग्रामीण अंचल, पशु-क्रूरता, औषधीय वनस्पति, पारंपरिक ज्ञान,
 
Krishna Kumar Mishra
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क्या हिन्दी अवधी को खा गयी!

क्या अवधी को हिन्दी खा गयी! अफ़सोस इस बात का है कि हिन्दी उत्तर भारत की तमाम बोलियों को खा तो गयी किन्तु हिन्दी हिन्दवी नही बन पायी। यह वाक्य शायद तमाम लोगों को अजीब लगे, पर यह मसला बहस का है। एक समय था जब ब्रज काव्य की भाषा के तौर पर भारत की तमाम [...]
 
Krishna Kumar Mishra
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सच्चे समाजवादी थे अवधी सम्राट

क्यों न हम पं० बंशीधर शुक्ल जी के जन्म-दिवस को विश्व अवधी दिवस के रूप में मनायें। वो विधायक थे, स्वंतत्रा संग्राम सेनानी थे और हिन्दी अवधी के मर्मग्य, लेकिन फ़िर भी वो जननायक नही थे और न ही नेता, असल में सच्चे हितैषी थे उन सभी प्रजातियों के जो इस धरती पर
 
Krishna Kumar Mishra
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पहला नशा, उम्र भर का ख़ुमार

मौसम यही था, बस उमर कुछ और थी. दीवाली से पहले की हल्की ठंड, बारिश की टिपिर-टिपिर से राहत. अच्छी-सी धूप, मीठा-मीठा गन्ना बिकने लगा था. बारिश में जमी काई धूप से सूखकर झड़ गई और सारे काले-भूरे भुए तितलियाँ बनकर उड़ गए, बरसों बाद हासिल ज्ञान से पता चला क
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दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार

गरम-गरम ख़बरों को साफ़-सुथरा करके आगे बढ़ाने में अब हथेलियाँ नहीं जलतीं, सालों हो गए, आदत पड़ गई है. धमाका, धुआँ, लाशें, आँसू, बिलखते बच्चे... सब होते हैं लेकिन वे अब बेचैन नहीं करते. इराक़, अफ़ग़ानिस्तान और इसराइल की ख़बरों ने नहीं, अफ्रीकी देश आइवर
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अजित भाई, हिम्मत जवाब दे रही है

आपका बकलमख़ुद सरकलमख़ुद जैसा ही है. कई लोग हिम्मत जुटा लेते हैं, एक हफ़्ते से चिंता में घुला जा रहा हूँ कि आत्मकथानुमा क्या लिखूँ. आपका रिमाइंडर आने ही वाला होगा, दुनिया में शायद आप ही हैं जिसे मेरे सरकलमख़ुद न करने पर मलाल होगा. सच मैं लिख नहीं सकता
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351 पोस्‍टो में यादो के झरोखे से झाकती 25 पोस्‍टे

जुलाई 2006 से आज तक हमने करीब 351 लेख महाशक्ति ब्‍लाग पर लिखे, और इन पोस्‍टो में 25 पोस्‍टे ऐसी रही जो कमेन्‍ट से महरूम रही। 14 मई 2008 के बाद ऐसी कोई पोस्‍ट नही नही जो टिप्‍पणी न प्राप्‍त कर सकी। कल अनायास ही ब्‍लाग हिस्‍ट्री देखने बैठा था लगा कि क्
 
महाशक्ति
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ब्लाग जब्त होना चिंता की बात नहीं-आलेख

दूसरे का मामला हो तो दिलचस्प हो जाता है पर जब स्वयं उससे जुड़े हों तो चिंताजनक लगता है। यही इस लेखक के साथ भी हुआ जब गुगल ने दो ब्लाग अमृत संदेश पत्रिका और सिंधु पत्रिका को डेशबोर्ड से हटा दिया। दो ब्लाग हटा दिये या किसी तकनीकी गड़बड़े मे फंस गये यह एक
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