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एक देहाती बोध कथा

घने डरावने जंगल से एक धुनिया (रुई धुनने वाला) जा रहा था। मारे डर के उसकी कँपकँपी छूट रही थी कि कहीं शेर न आ जाय ! धुनिए को एक सियार दिखा । पहले कभी नहीं देखा था इसलिए शेर समझ कर भागना चाहा लेकिन भागने से अब कोई लाभ नहीं था - खतरा एकदम सामने था। सियार को
 
गिरिजेश राव
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खुशी बांटने से १०० गुणा होकर आप के पास वापस आती हैं --------- यशवन्त मेहता

राजा बलि  को एक  शुभ कर्म के कारण एक दिन के लिये स्वर्ग का सिंहासन मिला. राजा बलि  जब सिंहासन पर बैठे तो उनको एक सन्त की बात याद आयी. सन्त ने कहा था "राजन्‌, अगर तुम अपनी खुशी दुसरों के साथ बाटोगें तो वह १०० गुणा हो कर तुम्हारे पास वापस
 
यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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सपूत

पुराने ज़माने की बात है ....तब आज की तरह पानी के लिए नल और बोरिंग जैसी सुविधा नही थी ....सिर पर कई घड़ों का भार लिए स्त्रियाँ कई किलोमीटर दूर तक जा कर कुओं या बावडियों से पानी भार कर लाती थी एक बार इसी तरह तीन महिलाएं घर की जरुरत के लिए पानी भार कर ला
 
वाणी गीत