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सभी खूबसूरत चेहरे होते नहीं बेवफा

गम की शाम ढ़ल ही जाती हैजख्म दिल के मिटा ही जाती है।।खुले रखो दिल के दरवाजे तो फिर नई मंजिल मिल ही जाती है।।सभी खूबसूरत चेहरे होते नहीं बेवफामिल ही जाती है तलाशने से वफा।।चलता रहता है यूं ही ये सिलसिलाजब तक रहता है जिदंगी का कारवां।। नोट-यह कविता
 
राजकुमार ग्वालानी
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