दायें या बायें के सिवा और भी बहुत-बहुत कुछ..
कल रात रॉबर्ट आल्टमैन की एक अपेक्षाकृत कम चर्चित फ़िल्म ‘कुकीज़ फॉरच्यून’ देखकर अनजाने एक बार फिर चकित हो रहा था कि यह जीवटधनी बूढ़ा कलाकार आखिर क्या खाकर इतनी सहजता से ऐसी सघन बुनावट हासिल कर लेता है. ख़ैर, अचरच और ‘ऑ’ की कुर्सी पर ढहे उनके काम को
Mar 19 2010 12:06 AM



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