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अर्थोपनिषद-4 (जेट एयर दोषी नही है)

जेट एयर ने लागत घटाने और मन्दी से निपटने के लिए अपनी कर्मचारियो की छटनी का निर्णय ले कर भारत मे एक युगांतकारी पहल की है। नागरिको को सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की गारंटी देना सरकारो का काम है न की निजी क्षेत्र (रोजगारदाता) का। आज राजनेता छटनी किए गए कर
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कहानी

शायद अब वह नहीं आयेगा उस दिन वह अचानक ही मुझसे टकरा गया था। मेरा स्कूटर अस्पताल के छोटे सँकरे गेट के अन्दर दाखिल हो रहा था और उसकी साइकिल तेजी से बाहर निकल रही थी। दोनों अपनी अपनी तेजी में थे। मोड़ पर आपस में भिड़ गये। हम दोनों ने एक दूसरे को चौंक कर द
 
अरविन्द कुमार
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खामोश ! पिता बहुत गुस्से में है

खामोश ! पिता बहुत गुस्से में है पता नहीं ! पिता आजकल किस पर गुस्सा करता है पर हाँ ! उसेक गुस्से से डरने वाला कोई न होगा तो छूट जायेगा पिता को पहाड़ बनाये रखने वाला अवलम्ब पिता बिना पहाड़ हुए जीकर क्या करेगा ! मैं जानता हूँ     &nb
 
प्रीतीश बारहठ
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तो सचमुच नही है हमारी अर्थव्यवस्था खस्ता ?

तो सचमुच हमारे अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता नहीं हुई है. हो भी कैसे? लाखों लोगों की नौकरियों पर गाज गिरने भर से देश की अर्थव्यवस्था थोड़ी ही पतली होती है? अब आर्थिक सर्वेक्षण को ही देख लीजिये. रोजगार जाने का हवाला इस सर्वेक्षण में कोई विस्तार से नहीं दि
 
yuva
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क्या ‘भ्रष्टाचार’ पर कोई कहानी नहीं बनती-आलेख

स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो नहीं प्रगतिशील नहीं है। कुछ लोग सांस्कृतिक और धर्मवादियों को भी गैर प्रगतिशील कहते हैं। दोनों प्रकार के लेखक और बुद्धिजीवी आपस में अनेक विषयों पर वाद