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मंजर

जब कभी आसमान पर चाँद आया,हमे अपने गाँव का मंजर याद आयाऊँची इमारतो और रंगीन रौशनी में रहते हुए भी,घर के आँगन में जलता वो चिराग याद आया मिलने को तो मिल जाते है यहाँ हर मोड़ पर आदमी,जाने क्यों दिल को वो इंसान याद आया जवानी पार कर जब बुदापे के दहलीज़ पर खड़े
 
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