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ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !

लगा कि ये साल वी सुक्खा-सुखियाँ ही निकल जाने को है, पर वह न हुआ । अपना आज कुछ ऎसा डौल लग गया कि, लगदा है आज सब बेडौल ही लिक्खा जावेगा । ऒऎ कोई नहीं, वो तो जैसे ही सन्दीप ने एक ठोका, यो लाग्या कि अब... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर
 
डा. अमर कुमार
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अपनी उनके संग सुरक्षित ड्राइविंग … …

मोबाइल के उपयोग एवं ड्राइविंग के समय टेप से छेड़छाड़ ( डा. अनुराग ) के बाद आपकी उनकी चटर चटर ही एक्सीडेन्ट का एक और मुख्य कारण है ! अपुन के उल्हासनगर के कारग़ुज़ारों ने अनोखा सीट-बेल्ट इज़ाद किया है, जी हाँ.. ख़ालिस Made in USA ! बगल में बैठी ख़ूबसूरत दुर्घटना
 
डा. अमर कुमार
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भईया, तनि हमारौ एकु फोटू चीन्ह देयो

पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक…  त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक । बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई …
 
डा. अमर कुमार
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भईया, तनि हमारौ एकु फोटू चीन्ह देयो

पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक…  त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक । बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई …
 
डा. अमर कुमार
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भईया, तनि हमारौ एकु फोटू चीन्ह देयो

पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक…  त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक । बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई …
 
डा. अमर कुमार
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चले जाना नहीं, होश उड़ाय के

मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले
 
डा. अमर कुमार
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चले जाना नहीं, होश उड़ाय के

मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले
 
डा. अमर कुमार
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चले जाना नहीं, होश उड़ाय के

मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले
 
डा. अमर कुमार