27 मई 2010बुद्ध पूर्णिमा के अवसर परसभी को बधाई!बुद्ध के सन्दर्भ में बधाई जैसे शब्द बौने प्रतीत होते हैं!बुद्ध का इस धरती पर आना, एक अनूठी घटना है!!बुद्ध हमारी चेतना को झंझोड़ जाते हैंबुद्ध का कहना कि“संसार मे दुःख है, दुःख का कारण है और कारण का उपाय
किसी नगर में बिलाल्पादक नामक एक धनिक रहता था. वह बहुत स्वार्थी था और सदाचार के कार्यों से कोसों दूर रहता था. उसका एक पड़ोसी निर्धन परन्तु परोपकारी था. एक बार पड़ोसी ने भगवान् बुद्ध और उनके शिष्यों को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया. पड़ोसी ने यह भी विचार
कुछ चरित्र हैं जो बार-बार दस्तक देते हैं, हर वक्त सजग खड़े होते हैंमानवता की चेतना का संस्कारकरने हेतु । पुराने पन्नों में अनेकोंबार अनेकों तरह से उद्धृत होकरपुनः-पुनः नवीन ढंग से लिखे जानेको प्रेरित करते हैं । इनकी अमितआभा धरती को आलोकित करतीहै, और
देव-यवन संघर्ष के समय कुछ अन्य लोग भी देवों के विरुद्ध यवनों के साथ मिल गए जिनमें एक सिद्धार्थ भी था जो एक प्रतिष्ठित देव शुद्धोधन का पुत्र था. उस समय देवों की परंपरा में बुद्ध एक उपाधि थी जो शीर्ष न्यायाधिपति को दी जाती थी. इस परंपरा में प्रथम
कुछ चरित्र हैं जो बार-बार दस्तक देते हैं, हर वक्त सजग खड़े होते हैंमानवता की चेतना का संस्कारकरने हेतु । पुराने पन्नों में अनेकोंबार अनेकों तरह से उद्धृत होकरपुनः-पुनः नवीन ढंग से लिखे जानेको प्रेरित करते हैं । इनकी अमितआभा धरती को आलोकित करतीहै, और
कुछ चरित्र हैं जो बार-बार दस्तक देते हैं, हर वक्त सजग खड़े होते हैं मानवता की चेतना का संस्कार करने । पुराने पन्नों में अनेकों बार अनेकों तरह से उद्धृत होकर भी पुनः-पुनः नवीन ढंग से लिखे जाने को प्रेरित करते हैं । इन की अमित आभा धरती को आलोकित करती है
कुछ चरित्र हैं जो बार-बार दस्तक देते हैं, हर वक्त सजग खड़े होते हैं मानवता की चेतना का संस्कार करने । पुराने पन्नों में अनेकों बार अनेकों तरह से उद्धृत होकर भी पुनः-पुनः नवीन ढंग से लिखे जाने को प्रेरित करते हैं । इन की अमित आभा धरती को आलोकित करती है
कुछ चरित्र हैं जो बार-बार दस्तक देते हैं, हर वक्त सजग खड़े होते हैं मानवता की चेतना का संस्कार करने । पुराने पन्नों में अनेकों बार अनेकों तरह से उद्धृत होकर भी पुनः-पुनः नवीन ढंग से लिखे जाने को प्रेरित करते हैं । इन की अमित आभा धरती को आलोकित करती है
भगवान बुद्ध के प्रभाव में आकर वैशाली की पिंगला-गणिका अम्बपाली (आम्रपाली) एक दिन भिक्षुणी हो गई. उसने समाधि की उच्चतम अवस्था का स्पर्श किया और पूर्णता प्राप्त भिक्षुणियों में वह एक हुई. अपने निरंतर जर्जरित होते हुए शरीर में बुद्ध-वचनों की सत्यता को प्