मां
रात के साये से जब भी डरता हूं मै ,अपनी मां को याद बेहद करता हूं मैं।जल्द ही लोरी सुनाने वो आ जाती ,सुन के लोरी फ़िर चैन से सोता हूं मैं।सदियों से ऐसी रिवायत चल रही है,तौरे-माज़ी हूं कभी ना बदला हूं मैं।ज़िन्दगी भर उनको क्यूं मैंने दिया दुख, अपने इस अहसास से
May 19 2010 03:42 PM



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