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पैने दांतों वाली
बिना किसी लाग लपेट के अब कुछ कहने को जी करता है सच कहने को जी करता है हाँ अब तो बस सच कहने को जी करता है......... १९७३ में लिखी बाबा नागार्जुन की '' पैने दांतों वाली'' कविता काफी मशहूर हुई थी| यह कविता उस दौर की राजनीतिक अशांति और उस अशांति के बीज से
May 13 2010 01:38 AM



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