ये किसकी बदबू है?
कोई शक नहीं, पिछड़े हुओं को हर कोई लतियाता है। मिसाल के लिए बिहार आने-जाने वाली ट्रेनों को देख लीजिए। या तो पूरी ट्रेन फटीचर होगी या फिर एक-दो ऐसी बॉगी जोड़ दी जाएगी कि उसमें सवार लोग पछताते-रोते-गरियाते मजबूरन सफर तय करेंगे। सहरसा-अमृतसर जनसेवा एक्सप्
Jun 12 2009 07:21 PM



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