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किसने लिखा - "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.." ?

जैसा कि अक्सर होता है कि इतिहास के अनछुए और अनदेखे पहलुओं को आज की रौशनी में देखने की कोशिशों पर सवाल उठ ही जाते हैं। आज़ादी के सिपहसालार हसरत मोहानी के बारे में जो दो कड़ियां मैंने पिछले दिनों लिखीं, उनका संपादित स्वरूप अख़बार "नई दुनिया" ने शनिवार के
 
पंकज शुक्ल
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सरफ़रोशी की तमन्ना............!

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा !! काकोरी कांड के नायकों राम प्रसाद बिल्स्मिल और अशफाक उल्लाह खान का यह बलिदान दिवस है.........19 दिसम्बर 1927 को आज ही के दिन इन दोनों क्रांतिकारियों को फाँसी की सजा हु
 
singhsdm
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हम भी आराम उठा सकते थे घर पर रहकर : रामप्रसाद 'बिस्मिल'

हैफ़ हम जिसपे कि तैयार थे मर जाने कोजीते जी हमने छुडाया उसी कशाने कोक्या न था और बहाना कोई तडपाने कोआस्मां क्या यही बाक़ी था सितम ढाने कोलाके ग़ुरबत में जो रक्खा हमें तरसाने कोफिर न गुलशन में हमें लाएगा सैयाद कभीयाद आएगा किसे यह दिल-ए-नाशाद कभीक्यों