पसंद करें
2
नापसंद करें

जनप्रतिनिधि गायब है अब तो गाड़ी लेकर ही लौटेगें

राजस्थान भर के लगभग 6 हजार जनप्रतिनिधि गायब है. लोगों की माने तो वो अब गाडी में सवार होकर ही वापिस लौटेगें. सूत्रों की माने तो प्रदेश भर में इन दिनों गाडियों की बुकिंग तेज हो गई है. हजारों जो एक साथ खरीदी जानी है. गाँव की सरकार जो उनके बलबूते बनेगी.
पसंद करें
4
नापसंद करें

प्रयाग से पटना के बीच बने भारत की नयी सिलिकॉन वैली

विभोर श्रीवास्तव को फोन किया था. 24 साल के विभोर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से एक साप्ताहिक अखबार निकालते हैं- मिशन नौकरी. खुद मैनेजमेन्ट के छात्र रहे हैं और नौकरी नहीं मिली तो नौकरी दिलाने के अभियान पर निकल पड़े हैं. अखबार की सात हजार प्रति छापते
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोटी फीस वसूल ली और झुनझुना पकड़ा दिया

सभी माता-पिता का सपना होता है कि उनका लाडला पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ा हो सके, उसे एक अच्छी नौकरी मिले और बुढ़ापे में वो उनका सहारा बन सके। इसके लिए वो अपने जीवन की कमाई अपने बच्चों की पढ़ाई में खर्च कर देते हैं. लेकिन ज़रा सोचिये कि इतनी मशक्क़त के
पसंद करें
1
नापसंद करें

और वही नयी हिन्दी होगी

करीब दो महीने हो गए। जानेमाने आर्थिक अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के संपादकीय पेज पर 19 नवंबर को टी के अरुण ने एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था - Hindi an endangered language? इसके प्रमुख अंश मैं पेश कर रहा हूं ताकि हम सभी इन मुद्दों पर सार्थक रूप से सोच सकें।
पसंद करें
2
नापसंद करें

मैं जिंदा हूं और भारत वापस लौटूंगा

धरती के मानचित्र पर भारत सबसे अधिक रहस्यमय देश हैं. भारत में ऐसे कई पात्र ऐसे हैं जो संसार के रंगमंच से कभी विदा ही नहीं हुए. इसमें रामायण और महाभारत काल के कुछ पात्र आज भी उपस्थित माने जाते हैं. नेताजी ऐसे ही चरित्र हो गये हैं. आजादी के रंगमंच का एक ऐसा
पसंद करें
1
नापसंद करें

खेल संगठनों की चैरिटेबल निरंकुशता

हाल के दिनों में देश के प्रमुख खेल संगठन लगातार विवादों के घेरे में रहे. इनमें हाकी इंडिया का विवाद कुछ ज्यादा लंबा खिंचा मगर भारतीय ओलंपिक एसोसियेशन, बोर्ड ऑफ क्रिकेट कण्ट्रोल ऑफ इंडिया और नेशनल राइफल एसोसियेशन की भूमिका भी काफी हद तक संदेह के घेरे में
पसंद करें
2
नापसंद करें

जाति की सामंती सोच का विनाश होना जरूरी

लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार को बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की लिस्ट में जिस तरह से संबोधित किया गया है वह कांग्रेसी नेताओं की सामंती सोच का एक प्रतिनिधि नमूना है. जिन लोगों ने यह काम किया उनके ऊपर दलित एक्ट में मुक़दमा भी शुरू कर दिया गया है लेकिन इस से
पसंद करें
1
नापसंद करें

नेशनल गेम होने का नेशनल शेम

भारतीय मीडिया जगत में आखिरी बार हॉकी का जिक्र तब हुआ था जब भारतीय हॉकी पिछले साल अप्रैल में भंग कर दिया गया था. फेडरेशन के अध्यक्ष पर गुण्डई के इतने आरोप लगे कि भारतीय ओलंपिक संघ ने इस संस्था को ही ध्वस्त कर दिया. इसके बाद न हॉकी का कभी जिक्र हुआ और न
पसंद करें
3
नापसंद करें

लखनऊ की पत्रकारिता में लोकतंत्र लौट आया है

दस जनवरी को सम्पन्न यूपीएसएसीसी के चुनाव के परिणाम पर चुनाव अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किये जाना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। हेमंत तिवारी इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों को भड़का कर पत्रकारों के बीच अनावश्यक मतभेद पैदा करा रहे हैं। आरोप लगाने की घृणित
पसंद करें
0
नापसंद करें

मोदी शरणम् गच्छामि

अमिताभ बच्चन कह रहे हैं कि वे गुजरात का प्रचार करेंगे और मोदी कह रहे हैं वे अमिताभ की फिल्मों को प्रमोट करेंगे. मोदी को छोड़ दें तो अमिताभ बच्चन की हकीकत यह है कि वे पापी पेट के वास्ते कुछ भी कर सकते हैं. वे मुलायम सिंह यादव के दरवाज़े पर भी रेंग सकते
पसंद करें
1
नापसंद करें

मैडल वापसी काफी नहीं, 'राठौरों' से मुक्ति कब?

सोचो, मीडिया आवाज न उठाता। रुचिका केस में अदालती फैसले को दिन का घटनाक्रम मान आगे बढ़ जाता। तो क्या बात इतनी दूर तलक जाती? क्या 19 साल से कुंभकर्णी नींद सोई सरकार जागती? अब रुचिका के गुनहगार एसपीएस राठौर पर मुकदमों का बोझ। होम मिनिस्ट्री भी मैडल छीनने का
पसंद करें
2
नापसंद करें

विधु विनोद चोपड़ा का 'चिरकुटपना'

यह सिर्फ चिकोटीभर काटने का मामला नहीं है, विधु विनोद चोपड़ा पर दूसरा ऐसा मौका है जब धोखाधड़ी का आरोप लगा है। ‘3 इडियट्स’ चेतन भगत; तो ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ आफाक अलमास हुसैन के लिए ‘छलिया’ साबित हुई है। हालांकि दोनों ही लेखकों ने ‘फिल्म लेखक संघ’ में अपनी
पसंद करें
0
नापसंद करें

सफदर की सोच से 'सहमत' होने का वक्त

21 साल बीत गये. जब मेरे दोस्त सफदर को दिल्ली के पास औद्योगिक इलाके में सदा सदा के लिए हमसे छीन लिया गया था. सफदर के बारे में लिखने के लिए कलम उठाने में मुझे 21 साल लग गये. 21 साल बाद वर्तमान में जब अतीत की घटनाओं को देखते हैं तो पूरी शिद्दत से महसूस होता
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्यार, कौमार्य और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

दुष्कर्म के एक मामले में उच्चतम न्यायलय का एक महत्पूर्ण निर्णय आया है। दुष्कर्म के आरोप में एक दोषी को यह कह कर निर्दोष करार दे दिया कि पीड़िता ने खुद कौमार्य खोया। खबर प्रकाशित हुई। नये साल के पहले दिन। अंदर के पेज में। छोटे से कॉलम में। नये साल के जश्न
पसंद करें
4
नापसंद करें

पाखंडी, व्याभिचारी, दुराचारी तथा दुष्टप्रवृत्ति वाला एक डीजीपी

चंडीगढ़ स्थित हरियाणा की सीबीआई अदालत ने रुचिका गहरोत्रा आत्महत्या मामले में जो फैसला सुनाया है उसने एक बार फिर न्याय को लेकर देशभर में राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी है. एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि देश का न्याय क्या ऊंचे रुसूख रखने वाले लोगों के
पसंद करें
2
नापसंद करें

एक भारतीय की क्या कीमत?....40 सेंट!

दिल्ली में यमुना के किनारे एक कोयला से चलनेवाला बिजलीघर है. दिल्ली सरकार ने 160 मेगावाट के राजघाट थर्मल पावर स्टेशन नामक इस बिजलीघर को बंद करने का निर्णय लिया है. दिल्ली सरकार का तर्क है कि कोयले से प्रदूषण फैलता है इसलिए उसने यह निर्णय लिया है. बड़े
पसंद करें
2
नापसंद करें

सत्यानंद !.......कौन सत्यानंद?

हमारी कारपोरेट मीडिया के लिए यह कोई खबर हो भी नहीं सकती थी. हुई भी नहीं. झारखण्ड के किसी दूरस्थ स्थान रिखिया में एक कोई सत्यानंद सरस्वती नाम के संन्यासी ने देह त्याग कर दिया. तो? इसमें खबर क्या है? रोज न जाने कितने सन्यासी मरते मराते रहते हैं अब क्या
पसंद करें
1
नापसंद करें

सत्रह साल बाद भी सवाल जस का तस

दिसंबर 1992। एक बार फिर वह दिन आया है जिस दिन देश में भारत मां की दो आंखों के बीच कुछ कांटे चुभोने वाले लोगों ने नफरत का जहर भर दिया। यह दिन बहुत ही दुखद था। भावनाओं का ज्वार था और कथित कट्टरपंथियों के उत्तेजक भाषणों से उग्र होकर कारसेवकों ने बाबरी म
पसंद करें
0
नापसंद करें

भोपाल: 25 साल बाद

दो-तीन दिसंबर 1984 को भोपाल में जो विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना हुयी थी जिसकी मार आज भी उस शहर के लोग झेल रहे हैं। इस भीषणतम औद्योगिक दुर्घटना के पीड़ितों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। आज पच्चीस बरस बीत गए उस दर्दनाक हादसे को। समाजसेव
पसंद करें
1
नापसंद करें

खदानों में हाथ डालिये, कोड़ाओं और रेड्डियों जैसे खरबपति मिलेंगे

आप एक फावड़ा लीजिए. किसी आदिवासी इलाके में जाइये. वहां की अपेक्षाकृत कठोर धरती पर फावड़ा चलाइये. आपको हर ओर रेड्डियों और कोड़ाओं की अमूल्य धरोहर मिल जाएगी. हो सकता है आपको यह मजाक लगता हो लेकिन इस देश में राजनीति की एक नयी विधा विकसित हो गयी है. खदान
पसंद करें
1
नापसंद करें

यस, मिस्टर प्राईम मिनिस्टर

अरुन्धती राय, वंदना शिवा, संजीप पाण्डेय, अमित भादुड़ी जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में प्रधानमंत्री से आपरेशन ग्रीन हण्ट को रोकने की मांग की गयी है. पत्र में 250 वरिष्ठतम लोगों के हस्ताक्षर है
पसंद करें
0
नापसंद करें

हर रोज 26/11 लेकिन सुननेवाला कोई नहीं

आप पिछले कुछ दिनों में मीडिया का कवरेज देखकर इतने आश्वस्त तो जरूर हो गये होंगे मीडिया पूरी तरह से चिंतित है कि हमारे आपके सामने अब दूसरा 26/11 न हो. हमारा इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिंट मीडिया हर पहलू से लूप होल तलाश रहा है और हमें जानकारी दे रहा है क
पसंद करें
2
नापसंद करें

मेरे अल्लाह, सरकारी खर्चे पर मैं हाज़िर हूं....

ऊंच, नीच, अमीर, गरीब कोई भी मुसलमान हो जीवन में एक बार हज पर जाना ही चाहता है. क्यों न हो? पवित्र कुरान लिखता है- “लोगों पर यह अल्लाह का हक है कि जो उस घर तक पहुंचने का सामर्थ्य रखता हो, वो हज करे।” (कुरआन, 3:97) लेकिन अल्लाह के दर पर पहुंचने के लिए
पसंद करें
3
नापसंद करें

पापा का पेसमेकर फेल कर गया

भारत हैदराबाद मैच हार चुका था। वसुंधरा (घऱ) फोन किया और तबीयत पूछी तो बोले - ‘मैच का क्या हुआ यार’। आवाज में उत्साह व हड़बड़ी दोनों थे। मैनें कहा, मैच तो हार गए पर आप कैसे हो। जवाब पाता, उससे पहले मम्मी बोलीं- जल्दी आ, पापा बेहोश हो गए हैं। पहुंचा तब उ
पसंद करें
0
नापसंद करें

न हन्यते हन्यमाने शरीरे

हम प्रभाष जी के लिखे को विस्फोट पर प्रकाशित करते थे. अब हम ऐसा नहीं कर पायेंगे. 29 मई 1994 को प्रभाष जोशी ने यह कागद कारे लिखा था. अजल (मौत) के बारे में लिखते हुए प्रभाष जोशी ने लिखा था- जिस बंबई अस्पताल में सिर्फ एक दिन के चेक अप के लिए भर्ती हुआ था
पसंद करें
0
नापसंद करें

खुरदरे सच का खरा साथी

प्रभाष जी नि:संदेह हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरूष थे, लेकिन उससे भी कहीं बड़े वे इनसान और उसूलों के पक्के थे। आज की पत्रकारिता में सच कहने के पीछे भी सत्य छिपे होने लगे हैं – इसका असर सलीके से सच कहने में भी दिखने लगा है। आज हिंदी पत्रकारिता की कमान
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिहार में कब होगा भूमि सुधार

अनादिकाल से ही बिहार में क्रांति के बीज़ बोये जाते रहे हैं। बुद्व और महावीर के जीवन में बदलाव भी इसी धरती की देन रही है। आज़ादी के बाद भी इसी भूमि का एक लाल श्री जयप्रकाश नारायण ने पूरे देश में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया था। भले ही इन महापुरुषों का
पसंद करें
0
नापसंद करें

अंतिम संस्कार के मामले में जड़ता में फंसा चर्च

नवम्बर को ईसाई समाज `ऑल सोल्स डे´ मना रहा है। चर्चो के पदाधिकारी इस की तैयारियों में लगे हुए है। इस दिन ईसाई समाज के लोग कब्रिस्तानों में जाकर अपने बिछड़े परिजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रर्थाना करते है। हिन्दू समुदाय भी श्राद्व के दिनों में अपने प
पसंद करें
0
नापसंद करें

मंहगाई की मार, जनता लाचार लेकिन प्रसन्न है सरकार

मंहगे वक्त में दिल्ली तेजी से मंहगी हो रही है. डीटीसी ने किराया बढ़ा दिया है. दिल्ली मेट्रो ने भी घोषणा किया है कि वह ट्रेन का किराया बढ़ाने जा रहा है. लेकिन दिल्ली में केवल यात्रा ही मंहगी नहीं हो रही है. दिल्ली जल बोर्ड ने भी फैसला किया है कि वह पा
पसंद करें
3
नापसंद करें

राजस्थान में सुनाई दे रही है नक्सली कदमों की आहट

केन्द्र सरकार के लिए एक बुरी खबर हैं। आगे नक्सलवादियों का निशाना राजस्थान हो सकता है। अभी तक दिल्ली से दूर के प्रदेशों से दिल्ली को हिलाने वाले इस आन्दोलन की जडें अब दिल्ली से सटे राजस्थान में फैल सकती हैं। एक खुफिया रिपोर्ट को सच माने तो राजस्थान के
पसंद करें
0
नापसंद करें

मालेगांव से मडगांव तक : आतंक का नया चेहरा

दशकों से इस्लामी आतंकवाद का शिकार रहे भारत मां के जख्म इस बार कुछ ज्यादा गहरे हैं और दर्द भी असहनीय। कारण दीपावली से ऐन पहले गोवा के मडगांव में हुए विस्फोटों ने हिन्दुस्तानी अवाम को आतंक के एक नए चेहरे से रूबरू कराया है। ये नया चेहरा है हिन्दू आतंकवा
पसंद करें
4
नापसंद करें

सवाल आपसे है मी लॉर्ड!

आशुतोष अस्थाना पीएफ घोटाले का मुख्य अभियुक्त था और अपने इकबालिया बयान में वह छत्ताीस जजों के नाम उगल चुका था कि इन जजों के सहयोग और आदेश से उसने इस घोटाले को अंजाम दिया था। बताया तो यह भी जा रहा है कि अस्थाना अदालत में कोई और इकबालिया बयान देने जा रह
पसंद करें
1
नापसंद करें

अमीरी और गरीबी एक साथ, एक दूसरे को चिढ़ाती हुई

मुकेश अंबानी धन पिपासु व्यक्ति नहीं हैं. जो लोग उन्हें नजदीक से जानते हैं वे बताते हैं कि आचार विचार और भोजन में पूरी तरह से सात्विक और बहुत घरेलू किस्म के इंसान हैं. लेकिन मुकेश अंबानी सादगी पसंद व्यक्ति है ऐसा बिल्कुल नहीं है. वे भीमकाय सपने देखतें
पसंद करें
0
नापसंद करें

माओवाद महंगाई और मनमोहन

जमीनी हकीकत से जिसका कोई वास्ता नहीं होता वही ऐसा बयान दे सकता है। यह बात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संदर्भ में है और उन पर यह फिट बैठती है। महंगाई और माओवाद मुद्दे पर उनका जो नजरिया है उससे तो ऐसा लगता है कि वे सचमुच किस्मत के धनी हैं और उन्हें प्र
पसंद करें
0
नापसंद करें

राहुल न बच्चे हैं, न कच्चे

कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने जो राह निकाली उस पर अब पूरी कांग्रेस चल पड़ी है. लेकिन अपनी इस पथरीली राह के चलते राहुल गांधी अपने राजनीतिक विरोधियों के सामने मुसीबत भी बनते जा रहे हैं। जो लोग उन्हें बच्चा कहकर टालने के चक्कर में रहते थे, अब वे उन
पसंद करें
0
नापसंद करें

आतंकवादी रुखसाना को मार डालेंगे

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के कालसी गांव की किशोरी रुखसाना कौसर की बहादुरी के किस्से पूरे देश में सुने जा रहे हैं। उसके परिवार पर हमला करने वालों को अंदाज लग गया है कि जब एक बहादुर लड़की अपनी रक्षा खुद करने का फैसला कर लेती है तो खतरनाक हथियारों से ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

काली कुतिया अब मां नहीं बनेगी

मातृत्व एक ऐसी सौगात है जो हर जीव योनि को समान सुख देती है. मां का अपने शिशु से रिश्ता उस जीव योनि के स्वभाव से निर्धारित होता है. लेकिन हर जीव योनि में एक बात समान होती है कि मातृत्व के बिना संपूर्णता और संतति दोनों ही बधित हो जाते हैं. इंसान का बुद्धि
 
संजय तिवारी
पसंद करें
0
नापसंद करें

बोरे में भरकर आये बलात्कारी

अप्रैल, शनिवार की शाम सोनाचूड़ा बाजार में चहल-पहल जल्दी ही खत्म हो गयी. शाम के 6 बजे से ही खेजुड़ी सीमा क्षेत्र से बम के धमाके सुनाई पड़ रहे हैं. बाजार में माइक से संदेश दिया जा रहा है- रात में तुलाघाट की तरफ से हमला हो सकता है. रात के नौ बज रहे हैं
पसंद करें
0
नापसंद करें

परित्राणाय साधुनाम, विनाशाय च दुष्कृताम्

हम हमले में हताहत व्यक्तियों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि और परिवारजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं। साथ ही नक्सलियों/आतंकियों के इस कायराना हरकत की निंदा/भर्त्सना करते हैं।" नक्सल समेत हर तरह के आतंकी कार्रवाई के बाद सरकारों का यह ब
पसंद करें
1
नापसंद करें

गांधी का गुजरात दारू की भट्टी पर

कहने के लिए तो गुजरात में आजादी से पहले ही नशाबंदी है लेकिन जिस तरह देसी शराब को आग की भट्टी में पकाया जाता है ठीक उसी तरह गांधी का गुजरात भी पिछले चार दिनों से उसी दारू के भट्टी की आग में सुलग रहा है। अब तक करीबन 113 लोगों की मौत हो चुकी है और 280 स