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ईश्वर को नमन क्यों?

बिना बोले बातचीत - 6 ईश्वर या हमसे बड़े एवं शक्तिशाली व्यक्ति के प्रति आदर प्रकट करने के लिए हम उनके सामने घुटने टेकते हैं (ईसाई), शरीर को झुकाते हैं (मुसलमान), या साष्टांग प्रणाम करते हैं (हिंदू)। इन सब चेष्टाओं में जो सामान्य बात है वह यह है कि हम अ
 
बालसुब्रमण्यम
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घर की चाहरदीवारी और राष्ट्रों की सरहदें

बिना बोले बातचीत - 7हममें से प्रत्येक को हमारे चारों ओर कुछ न्यूनतम जगह की आवश्यकता होती है। इस जगह के भीतर कोई अन्य व्यक्ति घुस आए तो हम घबराहट महसूस करने लगते हैं। किसी के निजी क्षेत्र में घुसना उस पर आक्रमण करने के बराबर है। साधारणतः यह निजी क्षेत्र
 
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हाथ मिलाने का असली अर्थ

बिना बोले बातचीत - 5शारीरिक चेष्टाएं कुछ विशिष्ट संदर्भों में विशिष्ट अर्थ भी ग्रहण कर लेती हैं। उदाहरण के लिए नृत्य की मुद्राओं को लिया जा सकता है। प्रत्येक मुद्रा का अर्थ हमारी संस्कृति द्वारा निर्धारित होता है। एक अन्य उदाहरण परिवहन पुलिस द्वारा उपयोग
 
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सायास शारीरिक चेष्टाओं से बातचीत

बिना बोले बातचीत - 4पिछले लेख में हमने देखा कि हमारे मनोभावों को अनेक शारीरक चेष्टाएं भी व्यक्त करती है। मन में किसी प्रकार के भाव आने पर उस भाव से जुड़ी शारीरिक चेष्टाएं भी दिखाई देने लगती हैं। इन्हें देखकर कोई समझ सकता है कि हमारे मन में किस तरह के भाव
 
बालसुब्रमण्यम
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मुहावरे और शारीरिक चेष्टाएं

बिना बोले बातचीत - 3बिक्री कर्मचारी अपने ग्राहक को कोई चीज बेच पाता है या नहीं, यह ग्राहक पर उसके अच्छा प्रभाव डालने पर निर्भर करता है। चूंकि उसे ग्राहक से काम निकालना होता है, इसलिए उसमें उसके प्रति दैन्य भाव जागाना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए वह
 
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साक्षात्करों में सफलता

बिना बोले बातचीत - 2मान लीजिए, दो उद्योगों के प्रतिनिधि व्यावसायिक समझौता करने हेतु एकत्र हुए हैं। दोनों अपनी-अपनी कंपनी के उच्च पदाधिकारी हैं और उनका ही निर्णय अंतिम होगा। इसलिए समझौते की शर्तों पर सहमति होती है या नहीं, यह इन दोनों प्रतिनिधियों पर
 
बालसुब्रमण्यम
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बिना बोले बातचीत -1

राजनीतिकों, अभिनेताओं, कूटनीतिज्ञों, बिक्री कर्मचारियों व अन्य अनेक व्यवसायी लोगों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे अपने प्रतिद्वंद्वियों के हावभावों, उनके अव्यक्त विचारों व मनस्थिति का कितना सटीक आंकलन कर पाते हैं। इसके लिए इन सभी लोगों को मनुष्य
 
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