सूर्ख गुलशन
तू मेरे सूर्ख गुलशन को हरा कर दे , ज़मीं से आसमां का फ़ासला कर दे।हवाओं के सितम से कौन डरता है , मेरे सर पे चरागों की ज़िया कर दे ।या बचपन की मुहब्बत का सिला दे कुछ,या इस दिल के फ़लक को कुछ बड़ा कर दे।तसव्वुर में न आने का तू वादा कर , मेरी तनहाई के हक़ में दुआ
Jun 16 2010 10:47 AM



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