अटकन - बटकन, दहिया चटकन
यह कविता भी प्रतिमा की यादों से. आप भी अपनी यादों के झरोखे से एकाध कवितायें लाइये, ताकि आज के बच्चे उनका स्वाद ले सकें. भेजें- gonujha.jha@gmail.com पर इस कविता के लिए प्रतिमा कहती हैं- "केवल तुक मिलाती इस कविता का अर्थ आज भी नहीं पता, लेकिन इसे
May 19 2010 05:14 PM



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