कविता: संसार अनोखा
संसार अनोखाआसमान में है जो तारे,टिम - टिम कर टिमटिमाते सारे।टिमटिमाते है जो तारे,देखने में लगते है कितने प्यारे।आसमान में एक सूरज अपना,जिसके बारे में हम देखे सपना।ये धरती सहती है कितना भार,जिस पर है पूरा संसार।पृथ्वी पर ही है बस हरियाली,सूरज में ही है बस
Feb 09 2010 09:49 AM



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