कविता: बैगन के है नसीब फूटे
बैगन के है नसीब फूटेबैगन जी कि दिल्ली गई बरात,पहुचते पहुचते हो गई आधी रात ।मूली जी दुल्हन बनी थी ,मन ही मन वो सोच रही थी ।कब आयेंगे दुल्हे राजा ,उन्हें खिलाऊंगी हलुआ ताजा।तब तक आ गए दुल्हे राजा ,मूली ने देख रुकवाया बाजा।क्योकि दूल्हा थे बैगन काला ,मूली
Feb 10 2010 11:54 PM



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