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कविता: बैगन के है नसीब फूटे

बैगन के है नसीब फूटेबैगन जी कि दिल्ली गई बरात,पहुचते पहुचते हो गई आधी रात ।मूली जी दुल्हन बनी थी ,मन ही मन वो सोच रही थी ।कब आयेंगे दुल्हे राजा ,उन्हें खिलाऊंगी हलुआ ताजा।तब तक आ गए दुल्हे राजा ,मूली ने देख रुकवाया बाजा।क्योकि दूल्हा थे बैगन काला ,मूली
 
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कविता : पान ने बनाया सबसे बड़ा "डान"

पान ने बनाया सबसे बड़ा " डान " एक था पान का पत्तादिखने में लगता जैसे लत्तासब इसको खाते कलकत्ते में, अधिक दबाते इसको मुंह में।पान सबका मुंह करता लाल, तब तक मेरे फोन में आई काल। हमने उठाया और बोला कौन ?,उसने बोला मै हूँ मुंबई का " डान"।फिर मैंने बोला अरे
 
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कविता: चिड़िया के घोसले में अंडा

चिड़िया के घोसले में अंडाएक दिन मैंने देखा था ,चिड़ियों के घोसले में अंडा था ।उस अंडे में बच्चे थे,बच्चे सबसे अच्छे थे।चिड़िया जब जब आती थी ,बच्चों के मुहं में दाना दे जाती थी ।बच्चे अच्छे से खाते थे ,घोसले में मौज उड़ाते थे ।लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना
 
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कविता: थोड़ी सी कर ले पढाई

थोड़ी सी कर ले पढाईमैदान में लगी है कितनी घास ,जिसमें लगती है रोज लात।जानवर उसको खाते है ,अपना पेट फुलाते है ।उसी घास में सब खेलते है ,मौज मस्ती करते है ।मौज मस्ती नहीं ज्यादा करना ,सबको थोडा है पढाई करना ।लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ६, अपना घर
 
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कविता: आसमान क्या रंग बदलता

आसमान क्या रंग बदलता ऊपर देखो तारे देखो, आसमान के नज़ारे देखो ... नीचे देखो बजारें देखो, बच्चों के भी मजाके देखो ... आसमान भी क्या रंग बदलता, हम बच्चों का मन बदलता... तन है कैसा मन है कैसा, ये आसमान का रंग है कैसा... लेखक: ज्ञान कुमार, कक्षा ४, अपना घ
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कविता: आख़िर क्या......?

आख़िर क्या .... कुछ नही बोलता, फालतू में चिल्लाता... दूसरो को जगाता, सबकी नींद भगाता... फटी जेब सिलता, सभी से यह मिलता... हलवा पूड़ी खाता, रात को अपने घर में सोता ... आख़िर क्या ....? लेखक: आदित्य कुमार, कक्षा ७, अपना घर
 
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कहानी: हरहर सिंह की तरकीब

हरहर सिंह की तरकीब प्राचीन काल की बात है की एक राजा किसी नगर में राज्य करता था । वह बड़ा ही निर्दयी और क्रूर और हरदम दुखी रहने वाला राजा था । वह लोगो को हमेशा सताया और डराया करता था । वह सभी लोगो से अपने खेतों में काम करवाता था और काम के बदले जो भी प
 
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