वो शायद जुलाई की शाम थी या अगस्त की…याद नहीं. हम यूँ ही बातें करने की जगह ढूँढते-ढूँढते सरस्वती घाट पहुँच गए थे. वो जगह खूबसूरत है और हमारी मजबूरी भी क्योंकि इलाहाबाद में घूमने-फिरने के लिए इनी-गिनी जगहों में से एक है. उन दिनों मैं जबरदस्त इमोशनल
मैं वहां अचानक पहुंची थी। पानी के लिए तरसते इस शहर में पिछले महीने 3-4 दिन की बारिश में ही यमुना में उफान आ गया था। वहां पहुंचने पर दूर से ही मुझे काफी भीड़ दिखाई दी। मुझे लगा कोई ऐक्सिडेंट हो गया है , इसीलिए इतनी भीड़ जुटी है। खबर की डीटेल लेने के इ