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इस बारिश में बूँदें कुछ कम गिरेंगी

दिल के दायरे की हद नहीं होती जज़्बात कोई हो, ग़म या खुशी ना करने की ज़िद नहीं होती
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सुनो… मुझे तुम्हारी ये बातें अच्छी लगती हैं.

वो शायद जुलाई की शाम थी या अगस्त की…याद नहीं. हम यूँ ही बातें करने की जगह ढूँढते-ढूँढते सरस्वती घाट पहुँच गए थे. वो जगह खूबसूरत है और हमारी मजबूरी भी क्योंकि इलाहाबाद में घूमने-फिरने के लिए इनी-गिनी जगहों में से एक है. उन दिनों मैं जबरदस्त इमोशनल
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समंदर न सही, नदी का किनारा ही मिल जाता

मैं वहां अचानक पहुंची थी। पानी के लिए तरसते इस शहर में पिछले महीने 3-4 दिन की बारिश में ही यमुना में उफान आ गया था। वहां पहुंचने पर दूर से ही मुझे काफी भीड़ दिखाई दी। मुझे लगा कोई ऐक्सिडेंट हो गया है , इसीलिए इतनी भीड़ जुटी है। खबर की डीटेल लेने के इ
 
पूनम पांडे